महाराष्ट्र में कमजोर मानसून और भीषण गर्मी के कारण जल संकट गंभीर होता जा रहा है। अक्टूबर महीने में ही तापमान 38 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने और बांधों का जलस्तर तेजी से गिरने से राज्य के कई शहरों में पानी बचाने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। नागपुर, पुणे और छत्रपति संभाजीनगर में प्रशासन ने पानी की बर्बादी रोकने के लिए कड़े प्रतिबंध लागू करने शुरू कर दिए हैं। अब पानी बर्बाद करने पर भारी जुर्माना लगाने और अवैध जल कनेक्शन के मामलों में एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किए गए हैं।

कमजोर मानसून और ‘अल नीनो’ के असर के बीच महाराष्ट्र के प्रमुख बांधों और जलाशयों में पानी का स्तर खतरनाक स्थिति तक गिर गया है। बढ़ते तापमान और नलों में पानी की कमी के कारण जल संकट का असर आम जनजीवन पर पड़ने लगा है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि पानी की उपलब्धता बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। घटते जल भंडार को बचाने के लिए राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ने आपातकालीन कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। नागपुर, पुणे और छत्रपति संभाजीनगर जैसे बड़े शहरों में पानी की खपत नियंत्रित करने के लिए ‘जल कर्फ्यू’ जैसे कड़े नियम लागू किए जा रहे हैं।

पुणे में जल संकट से निपटने के लिए पानी की आपूर्ति और इस्तेमाल पर विशेष प्रतिबंध लगाए गए हैं। शहर को पानी उपलब्ध कराने वाले खड़कवासला बांध में 12 अक्टूबर तक 26.22 टीएमसी पानी शेष था। इस जल भंडार को 31 अगस्त 2027 तक बनाए रखने के लिए पानी की खपत में 10 प्रतिशत कटौती करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी योजना के तहत 15 अक्टूबर से शहर में हर गुरुवार को नलों के जरिए पानी की आपूर्ति बंद रहेगी।

पानी की बचत सुनिश्चित करने के लिए सरकारी और निजी वाहन धुलाई केंद्रों को भी अगले आदेश तक पूरी तरह बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा स्विमिंग पूल, बागवानी, आंगन और निर्माण कार्यों में पीने के पानी या बोरवेल के पानी के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रशासन ने आवासीय सोसाइटियों के लिए बागवानी और फ्लशिंग में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से उपचारित पानी का उपयोग अनिवार्य कर दिया है।

प्रशासन ने जलापूर्ति व्यवस्था में होने वाली बर्बादी रोकने पर भी जोर दिया है। पाइपलाइन या अन्य स्थानों पर पानी का रिसाव होने पर नागरिक पीएमसी केयर के माध्यम से इसकी सूचना दे सकेंगे। वहीं, पानी की बर्बादी और अवैध कनेक्शन के मामलों में भारी जुर्माने तथा एफआईआर की कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं।

महाराष्ट्र में अक्टूबर के दौरान ही बढ़ती गर्मी और घटते जल भंडार ने पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में नागपुर, पुणे और छत्रपति संभाजीनगर में लागू किए जा रहे प्रतिबंधों के जरिए प्रशासन का लक्ष्य सीमित जल संसाधनों को बचाना और उपलब्ध पानी का इस्तेमाल नियंत्रित करना है।

Pratahkal Newsroom

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