छोटीसादडी। प्रतापगढ़ और चित्तौड़गढ़ जिलों की सीमा पर स्थित विख्यात और प्रसिद्ध सीतामाता मंदिर में अमावस्या के पावन अवसर पर शनिवार को श्रद्धालुओं का एक अभूतपूर्व और भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। 14 मई से प्रारंभ हुए इस भव्य चार दिवसीय सीतामाता मेले में राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने माता सीता के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। भीषण और तपती गर्मी के बावजूद श्रद्धालुओं की अटूट आस्था, अगाध श्रद्धा और अभूतपूर्व उत्साह पूरे समय चरम पर दिखाई दिया। मंदिर परिसर में सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए हनुमान मंदिर से लेकर सीतामाता मंदिर तक करीब एक किलोमीटर लंबी महिलाओं और पुरुषों की अलग-अलग कतारें लगी रहीं। भीषण गर्मी के बीच दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को घंटों लंबा इंतजार करना पड़ा, परंतु इसके बावजूद प्रशासनिक मुस्तैदी के कारण पूरे मेला क्षेत्र में सभी व्यवस्थाएं पूर्णतः शांतिपूर्ण बनी रहीं।

श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर में टेंट, नि:शुल्क पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा और विश्राम की पुख्ता व्यवस्थाएं की गईं। मेले में लगातार बढ़ती भीड़ के भारी दबाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नानालाल ने स्वयं मोर्चा संभाला और सुरक्षा व्यवस्था का नेतृत्व किया। वहीं, देवगढ़ थाना अधिकारी नगुलाल के नेतृत्व में भारी पुलिस बल पूरे समय मेला क्षेत्र में तैनात रहा। यातायात का दबाव अत्यधिक बढ़ने पर प्रशासन और स्थानीय युवाओं ने मिलकर यातायात व्यवस्था को सुचारू रूप से संभाला। इसके साथ ही ग्राम पंचायत पाल की सरपंच संगीता मीणा एवं सरपंच प्रतिनिधि बाबूलाल मीणा ने मेले की तमाम व्यवस्थाओं की लगातार जमीनी निगरानी की। वन विभाग द्वारा पर्यावरण संरक्षण हेतु मेला क्षेत्र में एक विशेष प्लास्टिक मुक्त मेला अभियान चलाकर श्रद्धालुओं को जागरूक किया गया, जिसके तहत रेंजर सोमेश्वर त्रिदेव के कुशल निर्देशन में विभिन्न प्रमुख स्थानों पर सूचना पट्ट भी लगाए गए।

इस दौरान मेले में आए श्रद्धालुओं ने सुरम्य प्राकृतिक जलधाराओं, कल-कल बहते झरनों और घने वन क्षेत्र के मनोरम वातावरण का जमकर आनंद लिया। कई श्रद्धालुओं ने यहां की पवित्र जलधारा में स्नान कर विधि-विधान से अस्थि विसर्जन का कार्य भी संपन्न किया। स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां का प्राकृतिक जल औषधीय गुणों से पूरी तरह भरपूर माना जाता है, जिसे श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा के साथ बोतलों में भरकर अपने साथ घर ले जाते नजर आए। मेले के दौरान ऐतिहासिक वाल्मीकि आश्रम, लक्ष्मण बावड़ी और सीताबाड़ी क्षेत्र में भी भारी भीड़ देखी गई, जहां श्रद्धालुओं ने लव-कुश की पावन जन्मस्थली एवं उस पौराणिक स्थल के अत्यंत श्रद्धाभाव से दर्शन किए, जहां मान्यता के अनुसार माता सीता धरती में समा गई थीं। रात्रि के समय आयोजित भव्य भजन संध्या और विभिन्न भजन मंडलियों के भक्तिमय कार्यक्रमों ने पूरे वन क्षेत्र को आध्यात्मिक और भक्तिमय माहौल में पूरी तरह सराबोर कर दिया। करीब 15 किलोमीटर के विस्तृत और घने जंगल क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह उपलब्ध नहीं होने के बावजूद, श्रद्धालु आधुनिक संचार साधनों से दूर रहकर भी यहां की अलौकिक प्राकृतिक शांति और अद्वितीय आध्यात्मिक वातावरण का भरपूर आनंद लेते नजर आए।

Pratahkal Newsroom

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