प्रतापगढ़। राजस्थान की वीर धरा प्रतापगढ़ ने आज सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध एक निर्णायक युद्ध का शंखनाद किया है। ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच जब सैकड़ों हाथ "बाल विवाह मुक्त भारत" की तख्तियां लेकर सड़क पर उतरे, तो शहर का हर कोना इस कुप्रथा को जड़ से मिटाने के संकल्प से भर उठा। राज्य सरकार और जिला कलेक्टर के कड़े निर्देशों के अनुपालन में आयोजित इस भव्य जागरूकता रैली ने जीरो माइल चौराहे से लेकर वुडलैंड पार्क तक एक ऐसी चेतना की लहर पैदा की, जिसने बाल विवाह जैसी सदियों पुरानी बेड़ियों को तोड़ने का स्पष्ट संदेश दिया है। यह आयोजन केवल एक प्रदर्शन मात्र नहीं, बल्कि मासूम बचपन को सुरक्षित रखने की दिशा में एक सशक्त जनांदोलन की झलक थी।

भारत सरकार के 'बाल विवाह मुक्त भारत' अभियान के सफलतम एक वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में नई दिल्ली में आयोजित विशेष कार्यक्रम की तर्ज पर देशभर में 100 दिवसीय विशेष अभियान का आगाज़ किया गया है। इसी राष्ट्रव्यापी मुहिम को गति देने के लिए महिला अधिकारिता विभाग, प्रतापगढ़ द्वारा इस विशेष रैली का आयोजन किया गया। महिला अधिकारिता विभाग की सहायक निदेशक नेहा माथुर ने कार्यक्रम की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए बताया कि आगामी 100 दिनों तक प्रशासन का मुख्य ध्येय जिले के अंतिम छोर तक बाल विवाह रोकथाम का संदेश पहुँचाना है, ताकि कोई भी मासूम इस सामाजिक अभिशाप की बलि न चढ़ सके।

रैली का विधिवत शुभारंभ एडीजे केदारनाथ ने जीरो माइल चौराहे पर हरी झंडी दिखाकर किया। इस अवसर पर जनसमूह को संबोधित करते हुए एडीजे केदारनाथ ने अत्यंत गंभीर स्वर में कहा कि बाल विवाह न केवल कानून की नजर में एक दंडनीय अपराध है, बल्कि यह बच्चों के सुनहरे भविष्य और उनके मौलिक अधिकारों के साथ एक अक्षम्य अन्याय भी है। उन्होंने समाज के हर वर्ग से आह्वान किया कि इस बुराई को समाप्त करने के लिए सरकार के भरोसे बैठने के बजाय प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और इस सामाजिक बुराई के खिलाफ ढाल बनकर आगे आना होगा।

इस ऐतिहासिक रैली में महिला अधिकारिता विभाग के निष्ठावान अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ-साथ विभिन्न सरकारी विभागों के प्रतिनिधियों, प्रबुद्ध सामाजिक कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। "बचपन बचाओ, भविष्य बनाओ" जैसे गगनभेदी नारों के साथ जन-जन को जागरूक किया गया। रैली के दौरान आमजन से यह भावुक और कानूनन अपील भी की गई कि यदि कहीं भी बाल विवाह की भनक लगे, तो बिना डरे तुरंत प्रशासन या संबंधित हेल्पलाइन को सूचित करें। रैली का समापन वुडलैंड पार्क में हुआ, जहां यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि जब तक समाज बाल विवाह की बेड़ियों से मुक्त नहीं होगा, तब तक एक सशक्त और विकसित भारत की परिकल्पना अधूरी है। प्रतापगढ़ की सड़कों पर उमड़ा यह जनसैलाब आज इस बात का गवाह बना कि बदलाव की मशाल जल चुकी है।

Pratahkal Bureau

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