कृषि विभाग के कार्मिकों ने अपनी लंबित मांगों और कार्य संबंधी समस्याओं के समाधान को लेकर बुधवार को जिले के उप जिला कृषि कार्यालय परिसर में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। कृषि पर्यवेक्षक संयुक्त समन्वय समिति, राजस्थान के आह्वान पर आयोजित इस आंदोलन में कृषि कार्मिकों ने विभिन्न प्रशासनिक एवं तकनीकी मुद्दों को लेकर नाराजगी जताई और राज्य सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाने के लिए सहायक निदेशक कृषि (विस्तार) के माध्यम से ज्ञापन प्रेषित किया।

धरने के दौरान कृषि कार्मिकों ने कृषि मैपर ऐप में आ रही तकनीकी खामियों और जटिल प्रक्रियाओं को प्रमुख मुद्दा बताते हुए इसके शीघ्र समाधान एवं सरलीकरण की मांग की। उनका कहना था कि वर्तमान स्वरूप में ऐप पर प्रभावी एवं सुचारु रूप से कार्य करना संभव नहीं हो पा रहा है, जिससे विभागीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

ज्ञापन में एफपीओ, कृषि सखी, सीआरपी एवं एलआरपी को आवंटित किए जा रहे कार्यों पर भी आपत्ति दर्ज कराई गई। समिति ने मांग की कि विभागीय दायित्व कृषि कार्मिकों के माध्यम से ही संपादित किए जाएं तथा इसके लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। इसके साथ ही किसानों को विभिन्न कृषि योजनाओं के तहत मिलने वाली अनुदान राशि समय पर जारी करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

कृषि कार्मिकों ने विभागीय कार्यों के निर्वहन के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने, अवकाश के दिनों में कार्य लेने की स्थिति में नियमानुसार क्षतिपूर्ति अवकाश प्रदान करने तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत फसल कटाई प्रयोगों के लंबित मानदेय का शीघ्र भुगतान कराने की मांग भी उठाई।

इसके अतिरिक्त "हरियालो राजस्थान" कार्यक्रम के तहत प्रस्तावित पौधारोपण कार्यों के लिए पर्याप्त बजट, परिवहन व्यय तथा गड्ढों की खुदाई हेतु आवश्यक राशि उपलब्ध कराने की मांग ज्ञापन में शामिल की गई। समिति ने स्पष्ट किया कि यदि मांगों पर समयबद्ध एवं सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को आगे और व्यापक रूप दिया जा सकता है।

कृषि कार्मिकों के इस विरोध प्रदर्शन ने विभागीय कार्यप्रणाली, संसाधनों की उपलब्धता और तकनीकी व्यवस्थाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने ला दिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार और संबंधित विभाग इन मांगों पर क्या निर्णय लेते हैं।

Pratahkal Bureau

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