प्रतापगढ़ जिले के निजी शिक्षण संस्थानों के संचालकों ने शिक्षा विभाग की 'राज शाला संबलन' मोबाइल एप आधारित मासिक निरीक्षण व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को निजी विद्यालय संचालकों के प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की।

ज्ञापन में निजी स्कूल संचालकों ने 'राज शाला संबलन' ऐप आधारित निरीक्षण व्यवस्था को अव्यावहारिक, दमनकारी और निजी विद्यालयों की शैक्षणिक स्वायत्तता में हस्तक्षेप बताया। संचालकों का कहना है कि इस व्यवस्था को लेकर प्रदेशभर के निजी विद्यालयों में असंतोष है।

संचालकों ने ज्ञापन में बताया कि प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर के आदेश के अनुसार अब गैर-सहायता प्राप्त निजी विद्यालयों का भी प्रत्येक माह 'राज शाला संबलन' मोबाइल एप के माध्यम से 44 बिंदुओं पर निरीक्षण किया जाएगा। उनका कहना है कि बार-बार होने वाले डिजिटल निरीक्षण से शिक्षण कार्य प्रभावित होगा और विद्यालय प्रबंधन का अधिक समय औपचारिकताओं को पूरा करने में लगेगा।

निजी विद्यालय संचालकों ने कहा कि निजी विद्यालयों को आरटीई अधिनियम एवं राजस्थान गैर-सरकारी शैक्षिक संस्था अधिनियम के तहत स्वायत्तता प्राप्त है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के टी.एम.ए. पाई फाउंडेशन बनाम कर्नाटक राज्य मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि निजी गैर-सहायता प्राप्त संस्थानों को प्रशासनिक और आंतरिक संचालन की स्वतंत्रता दी गई है, जबकि वर्तमान निरीक्षण व्यवस्था इस भावना के अनुरूप नहीं है।

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि सरकारी और निजी विद्यालयों की कार्यप्रणाली, संसाधन और वित्तीय व्यवस्था अलग-अलग होती है। ऐसे में दोनों का समान मापदंडों पर मूल्यांकन उचित नहीं है। संचालकों ने आरोप लगाया कि नई निरीक्षण व्यवस्था से 'इंस्पेक्टर राज' को बढ़ावा मिलेगा, अनावश्यक प्रशासनिक दबाव बढ़ेगा और विद्यालयों का नियमित संचालन प्रभावित होगा।

निजी विद्यालय संचालकों ने यह भी मुद्दा उठाया कि एक ओर शिक्षा विभाग लगातार नए नियम और जांच प्रक्रिया लागू कर रहा है, वहीं दूसरी ओर आरटीई के तहत देय पुनर्भरण राशि लंबे समय से लंबित है। उन्होंने कहा कि इससे विशेषकर ग्रामीण और छोटे निजी विद्यालय आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

संचालकों ने प्री-प्राइमरी कक्षाओं का पुनर्भरण पूर्व की तरह शुरू करने तथा अभिभावकों की शिकायतों पर विद्यालय का पक्ष सुने बिना कार्रवाई नहीं करने की मांग भी रखी। प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर से सभी मांगों को राज्य सरकार तक पहुंचाने का आग्रह किया।

ज्ञापन के माध्यम से निजी विद्यालय संचालकों ने 'राज शाला संबलन' एप आधारित मासिक निरीक्षण आदेश वापस लेने, निजी विद्यालय संगठनों से चर्चा कर व्यावहारिक नियम बनाने, लंबित आरटीई भुगतान जारी करने, प्री-प्राइमरी पुनर्भरण शुरू करने, प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर स्कूल वाहनों की फिटनेस एवं पीयूसी जांच के लिए विशेष शिविर लगाने तथा निजी विद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों को मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा एवं बीमा योजना का लाभ देने की मांग की।

Dilip Sen, Pratapgarh

Dilip Sen, Pratapgarh

नाम: दिलीप सेन

वर्तमान पद: रिपोर्टर, जिला मुख्यालय (प्रातः काल)

कार्यक्षेत्र: प्रतापगढ़ जिला (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): क्राइम, राजनीति, और धर्म-कर्म

परिचय 

दिलीप सेन राजस्थान के प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय पर रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह मुख्य रूप से प्रतापगढ़ जिले और जिला मुख्यालय से जुड़े आपराधिक मामलों (क्राइम), स्थानीय राजनीति और धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों (धर्म-कर्म) की खबरों को कवर करते हैं। इन विषयों में उनकी विशेष रुचि और अच्छी पकड़ है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

दिलीप सेन को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में विभिन्न प्रिंट और डिजिटल न्यूज़ चैनलों के साथ काम करने का अनुभव है। वह निम्नलिखित मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं:

  • दैनिक भास्कर
  • सीधा सवाल
  • सच बेधड़क न्यूज़ चैनल
  • प्रातः काल (जिसके साथ वह साल 2025 से निरंतर जुड़े हुए हैं)

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने अपनी शिक्षा 12वीं पास तक पूरी की है।

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