प्रतापगढ़। छोटी काशी के नाम से विख्यात प्रतापगढ़ शहर में शुक्रवार को जगतगुरु रामानंदाचार्य प्रभु की जयंती के पावन अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का त्रिवेणी संगम देखने को मिला। वैष्णव बैरागी समाज द्वारा आयोजित इस भव्य शोभायात्रा में जनसैलाब उमड़ा, लेकिन इस भक्तिमय आयोजन के बीच नगर परिषद की 'उदासीनता' ने विवाद का रूप ले लिया है। पिछले तीन वर्षों से लगातार आयोजित हो रही इस शोभायात्रा की नगर परिषद द्वारा कथित तौर पर की गई अनदेखी ने अब एक बड़े सामाजिक रोष की शक्ल अख्तियार कर ली है, जिससे शहर के सामाजिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।

शोभायात्रा जब अपने निर्धारित मार्ग से होती हुई नगर परिषद कार्यालय के मुख्य द्वार के सामने पहुंची, तो वहां सन्नाटा पसरा रहा। परंपरा और शिष्टाचार के नाते जहां शहर की अन्य शोभायात्राओं और जुलूसों का नगर परिषद द्वारा गर्मजोशी से स्वागत व सम्मान किया जाता है, वहीं वैष्णव समाज की इस यात्रा के दौरान न तो कोई स्वागत द्वार दिखा और न ही परिषद का कोई प्रतिनिधि। इस उपेक्षापूर्ण व्यवहार ने यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के उत्साह को ठेस पहुंचाई और देखते ही देखते यह असंतोष समाज के प्रमुख पदाधिकारियों के बयानों में तल्खी बनकर उभर आया।

वैष्णव समाज के अध्यक्ष गोपाल दास बैरागी ने इस घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाते हुए मीडिया के समक्ष अपना पक्ष रखा। उन्होंने सीधे तौर पर नगर परिषद प्रशासन पर भेदभाव का आरोप मढ़ते हुए कहा कि यह केवल एक कार्यक्रम की अनदेखी नहीं, बल्कि पूरे समाज की भावनाओं का अपमान है। गोपाल दास बैरागी ने तर्क दिया कि जब शहर के अन्य सभी वर्गों और समुदायों के आयोजनों में नगर परिषद अपनी सक्रिय सहभागिता और सम्मान प्रदर्शित करती है, तो वैष्णव बैरागी समाज के साथ पिछले तीन वर्षों से यह सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है?

अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि वैष्णव समाज सदैव शांति, सद्भाव और सामाजिक समरसता का ध्वजवाहक रहा है, परंतु इस प्रकार की निरंतर उपेक्षा समाज के धैर्य की परीक्षा ले रही है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि लोकतांत्रिक और सामाजिक ढांचे में सभी समाजों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इस पूरे प्रकरण ने स्थानीय शासन की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है कि क्या स्वागत-सत्कार के मानक भी समाज विशेष के आधार पर तय किए जाते हैं? फिलहाल, समाज की इस नाराजगी ने शहर के प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।

Pratahkal Bureau

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