प्रतापगढ़ में जिला एवं सेशन न्यायाधीश आभा कुमारी ने हत्या के एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपी लक्ष्मण पुत्र मोहनलाल मीणा, उम्र 39 वर्ष, निवासी पाडलिया, थाना सुहागपुरा को पत्नी की हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। इसके साथ ही भारतीय दंड संहिता की धारा 201 के तहत 5 वर्ष के कठोर कारावास तथा 5 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया।

लोक अभियोजक तपनदास वैरागी ने बताया कि प्रकरण के अनुसार 25 मई 2024 को फरियादी महेश ने पुलिस थाना सुहागपुरा में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि उसकी मां देवली बाई ने करीब दो वर्ष पूर्व लक्ष्मण से नाता विवाह किया था और वह समय-समय पर फरियादी के घर भी आती थीं।

रिपोर्ट के अनुसार 24 मई 2024 को परिवार के लोगों ने सूचना दी कि देवली बाई का शव झन्या गांव में हाईवे किनारे पुल के नीचे पड़ा हुआ है। फरियादी अपने परिजनों के साथ मौके पर पहुंचा, जहां लोगों ने बताया कि लक्ष्मण ने देवली बाई के साथ मारपीट कर उसकी हत्या कर दी और शव को ठिकाने लगाने के उद्देश्य से झन्या पुल के नीचे नदी में फेंककर वहां से चला गया।

मामले में थाना सुहागपुरा पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 201 के तहत प्रकरण दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने न्यायालय में चालान पेश किया।

अभियोजन पक्ष की ओर से आरोप सिद्ध करने के लिए लोक अभियोजक तपनदास वैरागी ने 13 गवाहों के बयान प्रस्तुत किए। इसके अलावा न्यायालय के समक्ष 47 दस्तावेज और 6 आर्टिकल भी प्रदर्शित किए गए।

मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने आरोपी लक्ष्मण को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये के अर्थदंड तथा धारा 201 के तहत 5 वर्ष के कठोर कारावास और 5 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। राज्य सरकार की ओर से इस प्रकरण में लोक अभियोजक तपनदास वैरागी ने पैरवी की।

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