प्रतापगढ़ में जल संरक्षण कार्यों से बदला भूजल स्तर, कृषि को बढ़ावा
जिला प्रशासन और जल ग्रहण विकास विभाग के निरीक्षण में सामने आए सकारात्मक परिणाम, पारंपरिक फसलों के साथ अब नकदी फसलों और मत्स्य पालन से किसानों को हो रहा लाभ।

प्रतापगढ़ जिले के पंथोल में नवनिर्मित खर्चा वाला नाला एनीकट का निरीक्षण करते मीडिया प्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी।
जल संरक्षण और भू-संरक्षण कार्यों ने प्रतापगढ़ जिले की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। राज्य सरकार के निर्देशानुसार जिला कलेक्टर के मार्गदर्शन में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग तथा जल ग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग द्वारा बुधवार को जिले में जल संरक्षण एवं कृषक कल्याण के लिए किए जा रहे विकास कार्यों का मीडिया अवलोकन करवाया गया। इस दौरान मीडियाकर्मियों को विभिन्न एनीकट एवं जल संरक्षण संरचनाओं का निरीक्षण करवाते हुए इनके सकारात्मक प्रभावों की विस्तृत जानकारी दी गई।
अवलोकन कार्यक्रम में सहायक जनसंपर्क अधिकारी नवधा परदेशी, सुहागपुर जोन के कनिष्ठ अभियंता देवेंद्र रेगर, जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय से दशरथ लबाना सहित विभिन्न मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कनिष्ठ अभियंता देवेंद्र रेगर ने बताया कि पंथोल स्थित “खर्चा वाला नाला एनीकट” का निर्माण लगभग 29.92 लाख रुपए की लागत से करवाया गया है। एनीकट निर्माण के बाद क्षेत्र में भूजल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे आसपास के ग्रामीणों और किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि पहले क्षेत्र के किसान मुख्य रूप से गेहूं और मक्का जैसी पारंपरिक फसलें ही उगा पाते थे, लेकिन जल उपलब्धता बढ़ने के बाद अब सब्जियों सहित अन्य नकदी फसलों का उत्पादन भी शुरू हो गया है।
उन्होंने कहा कि एनीकट में जल भराव होने से मत्स्य पालन की संभावनाएं भी विकसित हुई हैं, जिससे ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हुए हैं। जल संरक्षण संरचना ने कृषि गतिविधियों को मजबूती देने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दी है।
इस दौरान मीडियाकर्मियों का संवाद स्थानीय लाभार्थियों से भी करवाया गया। लाभार्थी विमल ने बताया कि एनीकट निर्माण से पहले ग्रामीणों को दूर-दराज क्षेत्रों से पानी की व्यवस्था करनी पड़ती थी, जिससे भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। अब क्षेत्र में पानी की उपलब्धता बढ़ने से ग्रामीणों की समस्या का समाधान हुआ है। उन्होंने बताया कि एनीकट क्षेत्र अब ग्रामीणों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है, जहां बच्चे खेलने और समय बिताने आते हैं।
मीडियाकर्मियों को ग्राम पंचायत सेमलिया के बखतपूरा कुएं के पास निर्मित एनीकट का भी अवलोकन करवाया गया। लगभग 11.50 लाख रुपए की लागत से बने इस एनीकट से आसपास के किसानों को कृषि कार्यों में पर्याप्त सहायता मिलने लगी है। ग्रामीणों ने बताया कि जल संरक्षण संरचना बनने से खेतों में सिंचाई सुविधा बेहतर होगी तथा पशुओं के लिए भी पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।
इसके अतिरिक्त सोडलपुर स्थित “हिम्मतों की भे” क्षेत्र का भी निरीक्षण करवाया गया, जहां जल संरक्षण कार्यों से क्षेत्रीय विकास और कृषि गतिविधियों को नया आधार मिला है।
राज्य सरकार द्वारा जिले में जल संरक्षण और भू-संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से एनीकट, तालाब और जल संरचनाओं का निर्माण करवाया जा रहा है। इन कार्यों से न केवल भूजल स्तर में सुधार हो रहा है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादन में वृद्धि और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन को भी मजबूती मिल रही है। प्रतापगढ़ जिले में जल संरक्षण की यह पहल अब ग्रामीण विकास और कृषि समृद्धि का मजबूत आधार बनती दिखाई दे रही है।

Dilip Sen, Pratapgarh
नाम: दिलीप सेन
वर्तमान पद: रिपोर्टर, जिला मुख्यालय (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: प्रतापगढ़ जिला (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): क्राइम, राजनीति, और धर्म-कर्म
परिचय
दिलीप सेन राजस्थान के प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय पर रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह मुख्य रूप से प्रतापगढ़ जिले और जिला मुख्यालय से जुड़े आपराधिक मामलों (क्राइम), स्थानीय राजनीति और धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों (धर्म-कर्म) की खबरों को कवर करते हैं। इन विषयों में उनकी विशेष रुचि और अच्छी पकड़ है।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
दिलीप सेन को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में विभिन्न प्रिंट और डिजिटल न्यूज़ चैनलों के साथ काम करने का अनुभव है। वह निम्नलिखित मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं:
- दैनिक भास्कर
- सीधा सवाल
- सच बेधड़क न्यूज़ चैनल
- प्रातः काल (जिसके साथ वह साल 2025 से निरंतर जुड़े हुए हैं)
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी शिक्षा 12वीं पास तक पूरी की है।
