प्रतापगढ़। जनजाति अंचल की शैक्षणिक व्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले माँ बाड़ी शिक्षा सहयोगियों ने अब अपने हक की लड़ाई को सत्ता के गलियारों तक पहुँचा दिया है। बरसों से अल्प मानदेय और अनिश्चित भविष्य के बीच जूझ रहे इन शिक्षा दूतों ने अपनी मांगों को लेकर राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री हेमंत मीणा के अंबामाता स्थित निज निवास पर दस्तक दी। जनसुनवाई के इस मंच पर शिक्षा सहयोगियों ने अपनी व्यथा और लंबित मांगों का पुलिंदा मंत्री को सौंपते हुए न्याय की गुहार लगाई, जिससे इस मुद्दे ने एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।

वर्ष 2007-08 से संचालित माँ बाड़ी और डे केयर योजना के माध्यम से जनजाति क्षेत्रों के दुर्गम इलाकों में 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने वाले इन सहयोगियों का दर्द उस समय छलक पड़ा, जब उन्होंने मंत्री हेमंत मीणा को बताया कि वर्तमान में प्रदेश के जनजाति क्षेत्रों में लगभग 3350 केंद्र संचालित हैं। जनजाति क्षेत्र विकास विभाग द्वारा वित्तपोषित और स्वच्छ परियोजना के माध्यम से संचालित इन केंद्रों पर कार्यरत शिक्षा सहयोगी वर्षों से सेवाएं देने के बावजूद आज भी स्थायित्व और मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जीवन यापन कर रहे हैं।

ज्ञापन के माध्यम से शिक्षा सहयोगियों ने अत्यंत तकनीकी और नीतिगत मांगों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने मांग की है कि वरिष्ठता के आधार पर उनका कैडर निर्धारित किया जाए और उन्हें 'राजस्थान कॉन्ट्रैक्चुअल हायरिंग टू सिविल पोस्ट रूल्स 2022' के दायरे में लाया जाए, ताकि उनकी नौकरी को सुरक्षा मिल सके। इसके अतिरिक्त, बजट घोषणा 2025-26 के अनुरूप 5 लाख रुपये के रिटायरमेंट पैकेज को तत्काल लागू करने और वर्ष 2022 के बजट में घोषित 1000 रुपये के अतिरिक्त मानदेय का भुगतान करने की मांग भी पुरजोर तरीके से रखी गई। शिक्षा सहयोगियों का तर्क है कि माँ बाड़ी केंद्रों में प्री-प्राइमरी कक्षाओं में प्रवेश की स्वीकृति मिलने से न केवल केंद्रों की उपयोगिता बढ़ेगी, बल्कि जनजाति क्षेत्र का भविष्य भी अधिक उज्ज्वल होगा।

जनसुनवाई के दौरान कैबिनेट मंत्री हेमंत मीणा ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए शिक्षा सहयोगियों की प्रत्येक बात को गंभीरता से सुना। उन्होंने मौके पर ही संबंधित विभागीय अधिकारियों को इन मांगों के विधिक और प्रशासनिक परीक्षण के निर्देश दिए ताकि आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। मंत्री मीणा ने स्पष्ट शब्दों में भरोसा दिलाया कि जनजाति क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगाने वाले इन कर्मठ कर्मियों के हितों की अनदेखी नहीं की जाएगी। यह ज्ञापन महज कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की उम्मीद है जो जनजाति अंचल में साक्षरता का दीप जलाए हुए हैं, और अब देखना यह होगा कि सरकार के स्तर पर इन मांगों को कब तक अमलीजामा पहनाया जाता है।

Dilip Sen, Pratapgarh

Dilip Sen, Pratapgarh

नाम: दिलीप सेन

वर्तमान पद: रिपोर्टर, जिला मुख्यालय (प्रातः काल)

कार्यक्षेत्र: प्रतापगढ़ जिला (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): क्राइम, राजनीति, और धर्म-कर्म

परिचय 

दिलीप सेन राजस्थान के प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय पर रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह मुख्य रूप से प्रतापगढ़ जिले और जिला मुख्यालय से जुड़े आपराधिक मामलों (क्राइम), स्थानीय राजनीति और धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों (धर्म-कर्म) की खबरों को कवर करते हैं। इन विषयों में उनकी विशेष रुचि और अच्छी पकड़ है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

दिलीप सेन को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में विभिन्न प्रिंट और डिजिटल न्यूज़ चैनलों के साथ काम करने का अनुभव है। वह निम्नलिखित मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं:

  • दैनिक भास्कर
  • सीधा सवाल
  • सच बेधड़क न्यूज़ चैनल
  • प्रातः काल (जिसके साथ वह साल 2025 से निरंतर जुड़े हुए हैं)

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने अपनी शिक्षा 12वीं पास तक पूरी की है।

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