प्रतापगढ़: दमामी समाज ने रचा नया इतिहास, बाण माता मंदिर से निकली माँ सरस्वती की पहली भव्य शोभायात्रा से भक्तिमय हुआ शहर
प्रतापगढ़ में बसंत पंचमी पर दमामी समाज ने निकाली माँ सरस्वती की भव्य शोभायात्रा। बाण माता मंदिर से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी इस पहली ऐतिहासिक यात्रा में उमड़ा जनसैलाब। मेधावी छात्र-छात्राओं का हुआ सम्मान और मनीष दमानी ने साझा किया शिक्षा जागरूकता का संदेश। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

प्रतापगढ़। राजस्थान के प्रतापगढ़ शहर में बसंत पंचमी का पर्व इस बार केवल ऋतु परिवर्तन का प्रतीक नहीं रहा, बल्कि दमामी समाज की अटूट आस्था और सांस्कृतिक एकता का गवाह बना। ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती के प्राकट्य दिवस पर शहर में पहली बार दमामी समाज द्वारा एक ऐतिहासिक और भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसने समूचे नगर को केसरिया रंग और भक्ति के उल्लास में सराबोर कर दिया। बाण माता मंदिर के प्रांगण से शुरू हुई इस यात्रा ने आधुनिकता और परंपरा के अनूठे संगम के साथ शिक्षा का संदेश भी प्रसारित किया।
किला परिसर स्थित बाण माता मंदिर में विधि-विधान से पूजन के पश्चात माता सरस्वती की सुसज्जित प्रतिमा के साथ शोभायात्रा का श्रीगणेश हुआ। जैसे ही यात्रा सदर बाजार पहुंची, वहां का दृश्य देखते ही बनता था। गगनभेदी जयकारों और मधुर भक्ति गीतों की धुन पर दमामी समाज के सैकड़ों युवक-युवतियां झूमते और नृत्य करते नजर आए। पिपली चौक, धान मंडी और गोपालगंज जैसे प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों से गुजरती इस यात्रा का शहरवासियों ने पलक-पावड़े बिछाकर स्वागत किया। जगह-जगह हुई पुष्पवर्षा ने न केवल वातावरण को सुगंधित किया, बल्कि सामाजिक समरसता की एक नई मिसाल भी पेश की।
इस धार्मिक आयोजन का एक महत्वपूर्ण और प्रेरक पहलू शिक्षा को प्रोत्साहन देना रहा। शोभायात्रा के मार्ग में और समापन स्थल पर समाज की मेधावी प्रतिभाओं का सम्मान किया गया। विशेष रूप से कक्षा 10वीं और 12वीं में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को समाज के पदाधिकारियों द्वारा सम्मानित किया गया। इस कदम का उद्देश्य युवा पीढ़ी को शिक्षा के प्रति जागरूक करना और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए प्रेरित करना था।
दमामी समाज के सक्रिय सदस्य मनीष दमानी ने इस ऐतिहासिक पहल पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रतापगढ़ शहर के इतिहास में दमामी समाज द्वारा पहली बार माता सरस्वती की इतनी विशाल शोभायात्रा का आयोजन किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस आयोजन का मूल उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना और समाज में बौद्धिक चेतना का संचार करना है।
यात्रा का समापन पुनः किला परिसर में भव्य आरती के साथ हुआ, जिसके उपरांत आयोजित स्नेह भोज में समाज के सैकड़ों लोगों ने सामूहिक रूप से सहभागिता की। यह आयोजन न केवल दमामी समाज की एकजुटता का प्रतीक बना, बल्कि इसने प्रतापगढ़ की सांस्कृतिक विरासत में एक नया और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है।

Pratahkal Bureau
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