सीतामाता वन अभयारण्य में ग्राम पंचायत मांड कला एवं ग्राम पंचायत पाल के तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय सीतामाता मेले में शनिवार को आस्था का विशाल जनसैलाब उमड़ने की संभावना है। 14 मई से शुरू हुए इस मेले में राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। अमावस्या और रविवार के अवकाश के कारण शनिवार को श्रद्धालुओं की संख्या में और अधिक वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। यह मेला अपनी पौराणिक मान्यताओं और प्राकृतिक सौंदर्य के साथ एक अनोखा आध्यात्मिक अनुभव प्रस्तुत करता है, जहां लगभग 15 किलोमीटर के दायरे में मोबाइल नेटवर्क कार्य नहीं करता। श्रद्धालु बड़ीसादड़ी अथवा प्रतापगढ़ मार्ग से 3 से 4 किलोमीटर तक पथरीले और पहाड़ी रास्तों पर पैदल यात्रा कर मंदिर तक पहुंचते हैं, जहां वे रोजाना लगभग 8 घंटे तक मोबाइल और इंटरनेट से दूर रहते हुए जंगल की शांति और आस्था का अनुभव कर रहे हैं।

सीतामाता मंदिर तक पहुंचने वाला मार्ग अत्यंत कठिन और जोखिमभरा माना जाता है। पहाड़ियों के बीच संकरे रास्तों पर कई स्थानों पर पत्थर बिछाकर आवागमन की व्यवस्था की गई है। भारी भीड़ के बावजूद श्रद्धालुओं का विश्वास है कि माता के आशीर्वाद से आज तक यहां कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ है। प्रशासनिक व्यवस्थाओं के साथ-साथ श्रद्धालुओं का अनुशासन भी मेले को सुरक्षित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

मेले में आने वाले अधिकतर परिवार अपने साथ भोजन और पानी की व्यवस्था लेकर पहुंचते हैं, जबकि कई श्रद्धालु जंगल में ही भोजन बनाकर पारिवारिक समय व्यतीत करते हैं। यहां सीतामाता मंदिर, लव-कुश जन्मस्थली, महर्षि विश्वामित्र आश्रम, लक्ष्मण बावड़ी तथा 12 बीघा क्षेत्र में फैला विशाल बरगद प्रमुख आकर्षण बने हुए हैं। मान्यता है कि इसी स्थान पर हनुमानजी को आम के पेड़ से बांधा गया था। श्रद्धालु उस पवित्र दरार के भी दर्शन करते हैं, जहां मान्यता अनुसार माता सीता धरती की गोद में समा गई थीं। यहां मौजूद ठंडी और गर्म जलधाराएं भी आस्था का केंद्र बनी हुई हैं। नंदी मुख से बहने वाली जलधारा का पानी श्रद्धालु बोतलों में भरकर घर ले जाते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार यह जल अत्यंत शुद्ध एवं आयुर्वेदिक गुणों से युक्त माना जाता है, वहीं लक्ष्मण बावड़ी के जल को कई बीमारियों में लाभकारी बताया जाता है।

मेले की व्यवस्थाओं को लेकर जिला कलेक्टर के निर्देश पर अधिकारियों ने मेला स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। इस दौरान सरपंच संगीता मीणा, ग्राम विकास अधिकारी जीवनलाल मीणा, गणपतलाल मीणा, मांडकला सरपंच भांजी भाई मीणा, विकास अधिकारी भरत सेन एवं अतिरिक्त विकास अधिकारी सत्यप्रकाश जैन उपस्थित रहे। यह मेला आस्था, प्रकृति और परंपरा के अद्वितीय संगम के रूप में श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

Shelendra Singh Yadav(Pratapgarh)

Shelendra Singh Yadav(Pratapgarh)

नाम: शैलेन्द्र सिंह यादव (Shelendra Singh Yadav)

वर्तमान पद: संवाददाता (प्रातःकाल)

कार्यक्षेत्र: छोटीसादड़ी, जिला प्रतापगढ़ (राजस्थान)

अनुभव: 10 वर्षों से अधिक

परिचय 

शैलेन्द्र सिंह यादव राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले छोटीसादड़ी क्षेत्र के संवाददाता हैं। वह मुख्य रूप से स्थानीय स्तर पर सामाजिक, धार्मिक एवं जमीनी हकीकत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां और समाचार एकत्रित कर उन्हें प्रकाशित करने का कार्य करते हैं।

बीट और कवरेज (Beats & Coverage)

वह अपने कार्यक्षेत्र से निम्नलिखित सभी प्रमुख विषयों पर नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं:

  • राजनीति: स्थानीय राजनीतिक घटनाक्रम, चुनाव और जनप्रतिनिधियों से जुड़े समाचार।
  • क्राइम: पुलिस कार्रवाई, कानून-व्यवस्था और अपराध से संबंधित मामले।
  • प्रशासन: सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली, प्रशासनिक निर्णय और विकास कार्य।
  • शिक्षा एवं स्वास्थ्य: क्षेत्र की शैक्षणिक व्यवस्था, चिकित्सा सेवाएं और सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं।
  • बिज़नेस: स्थानीय बाजार, व्यापारिक गतिविधियां और आर्थिक मुद्दे।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने अपनी शिक्षा में स्नातक (Graduate) की डिग्री हासिल की

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