प्रतापगढ़ में चंदन वन की स्थापना को लेकर वन मंत्री ने गंधेर साइट का बारीकी से निरीक्षण कर उसे अंतिम रूप प्रदान किया। यह निरीक्षण स्थल पर विकास की संभावनाओं और परियोजना की उपयुक्तता को ध्यान में रखते हुए किया गया, जिसके बाद साइट को औपचारिक रूप से फाइनल कर दिया गया।

इस अवसर पर मुख्य वन संरक्षक, उदयपुर भी उपस्थित रहे। उदयपुर से पहुंचे मुख्य वन संरक्षक की मौजूदगी में परियोजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई और आगे की दिशा तय की गई।

उप वन संरक्षक सुरेश अग्रवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि विभाग द्वारा इस परियोजना की विस्तृत कार्ययोजना (डिटेल्ड एक्शन प्लान) को तैयार करने का कार्य अति शीघ्र प्रारंभ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चंदन वन परियोजना को वैज्ञानिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से विकसित करने की दिशा में विभाग तेजी से कार्य कर रहा है।

इस दौरान वन मंडल प्रतापगढ़ के सभी अधिकारी, सहायक वन संरक्षक प्रतापगढ़, क्षेत्रीय वन अधिकारी प्रतापगढ़ सहित वन विभाग के अन्य कार्मिक भी मौजूद रहे। समूचे निरीक्षण और विचार-विमर्श के दौरान परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर समन्वित प्रयासों पर जोर दिया गया।

वन विभाग की ओर से यह भी बताया गया कि चंदन का पौधा अर्द्ध परजीवी (सेमी पैरासाइटिक) प्रकृति का होता है, जो अपने भोजन के लिए होस्ट प्लांट पर निर्भर रहता है। इसी कारण इसे मूंग, अरहर की दाल, मेंहदी जैसे होस्ट प्लांट के साथ उगाया जाता है, ताकि इसके विकास के लिए आवश्यक पोषण संतुलन बना रहे।

इस निरीक्षण और साइट फाइनल होने के साथ ही चंदन वन परियोजना को लेकर प्रतापगढ़ में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा है, जिससे क्षेत्र में वन विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नई संभावनाएं सृजित होने की उम्मीद जताई जा रही है।

Pratahkal Bureau

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