प्रतापगढ़। राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है, जहाँ खाकी पर गंभीर आरोप लगाते हुए जनसैलाब सड़कों पर उतर आया। जिला चिकित्सालय के पीछे स्थित कॉलोनी में एक व्यक्ति के साथ हुई कथित बर्बरता और पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में सोमवार को शहर की सड़कों पर भारी रोष देखने को मिला। पूर्व विधायक रामलाल मीणा के नेतृत्व में आयोजित इस विशाल प्रदर्शन ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है, जिसमें दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल बर्खास्त करने और पीड़ित को न्याय दिलाने की पुरजोर मांग की गई।

घटनाक्रम की शुरुआत तिरंगा चौराहे से हुई, जहाँ से आक्रोश रैली का आगाज़ किया गया। विभिन्न मार्गों से होती हुई यह रैली जब कलेक्ट्रेट पहुंची, तो माहौल पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी से गूंज उठा। प्रदर्शन के दौरान पार्षद शाकिर शेख ने पुलिस अधीक्षक बी. आदित्य के नाम एक विस्तृत ज्ञापन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गजेंद्र सिंह जोधा को सौंपा, जबकि जिला कलेक्टर डॉ. अंजलि राजोरिया को भी मामले की गंभीरता से अवगत कराया गया। इस विरोध प्रदर्शन में सदर खानशेद खान सहित बड़ी संख्या में समाज के प्रबुद्ध जन और स्थानीय निवासी शामिल हुए।

ज्ञापन में तत्कालीन कोतवाली थानाधिकारी दीपक बंजारा और उनके साथ मौजूद कुछ पुलिसकर्मियों सहित नर्सिंग कर्मियों पर बेहद संगीन आरोप मढ़े गए हैं। शिकायत के अनुसार, बीती 31 दिसंबर की रात पुलिस ने मर्यादाओं को ताक पर रखकर अब्दुल हमीद के घर का दरवाजा तोड़ दिया और उनके साथ बेदर्दी से मारपीट की। आरोप है कि इस हमले में हमीद का एक हाथ और एक पैर टूट गया। इतना ही नहीं, प्रदर्शनकारियों का दावा है कि पीड़ित को जान से मारने की धमकी दी गई और विरोध करने पर एनडीपीएस (NDPS) जैसे गंभीर और झूठे मुकदमों में फंसाने का डर दिखाया गया।

मामले में कानूनी पेच तब और उलझ गया जब पुलिस ने 31 दिसंबर की रात को ही अब्दुल हमीद को अरनोद थाने में एक वांछित आरोपी के रूप में गिरफ्तार दिखाया। प्रदर्शनकारियों ने इस गिरफ्तारी को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक सुनियोजित साजिश और अवैध कृत्य करार दिया है। पूर्व विधायक रामलाल मीणा ने तीखे लहजे में कहा कि पुलिस की यह कार्यशैली लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अफीम किसानों को एनडीपीएस एक्ट का भय दिखाकर अवैध वसूली और यातायात चेकिंग के नाम पर गरीबों का शोषण अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रशासन को सात दिन का अल्टीमेटम देते हुए रामलाल मीणा ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में दोषी पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप धारण करेगा। वहीं, दूसरी ओर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गजेंद्र सिंह जोधा ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन की जांच क्या मोड़ लेती है और क्या पीड़ित परिवार को वह न्याय मिल पाता है जिसकी उम्मीद में पूरा शहर आंदोलित है।

Pratahkal Newsroom

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