प्रतापगढ़: बोर्ड परीक्षा में स्वर्णिम सफलता की तैयारी, जिला स्तरीय उन्नयन कमेटी ने कसी कमर
प्रतापगढ़ में बोर्ड परीक्षा 2025-26 के परिणाम सुधार हेतु जिला शिक्षा अधिकारी कमलेश तेतरवाल की अध्यक्षता में उन्नयन कमेटी की बैठक हुई। मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी अनिल पोरवाल और जिला कलेक्टर अंजली राजोरिया के निर्देशन में शेखावाटी मिशन-100 के मॉडल पेपर, अतिरिक्त कक्षाओं और ग्रामीण छात्रों के लिए विशेष फर्नीचर जैसी अभिनव पहल की गई है, ताकि जिले का शैक्षणिक स्तर उन्नत हो सके।

प्रतापगढ़। जिले के शैक्षणिक परिदृश्य को एक नई ऊंचाई देने और आगामी बोर्ड परीक्षाओं में विद्यार्थियों के प्रदर्शन को उत्कृष्ट बनाने के संकल्प के साथ प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह सक्रिय हो गई है। सत्र 2025-26 की कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की आहट के बीच, प्रतापगढ़ में परीक्षा परिणाम में क्रांतिकारी सुधार लाने के उद्देश्य से एक उच्च स्तरीय जिला स्तरीय परीक्षा परिणाम उन्नयन कमेटी का गठन किया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) कमलेश तेतरवाल की अध्यक्षता में गठित इस विशेष रणनीति समूह में जिले के सभी मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है, जबकि प्रत्येक ब्लॉक से शिक्षा जगत के दो से तीन अनुभवी और विशेषज्ञ शिक्षकों को भी इस मिशन का हिस्सा बनाया गया है।
शिक्षा विभाग की इस महती योजना को धरातल पर उतारने के लिए गुरुवार को मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी अनिल पोरवाल की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य स्वर केवल समीक्षा तक सीमित नहीं था, बल्कि यह जिले के भविष्य को संवारने का एक खाका तैयार करने जैसा रहा। बैठक में अब तक ब्लॉक स्तर पर किए गए प्रयासों की गहन विवेचना की गई और नवाचारों पर विस्तार से फीडबैक लिया गया। जिले के सभी उच्च माध्यमिक विद्यालयों में पिछले दो महीनों से जारी अतिरिक्त कक्षाओं और प्रति पखवाड़े आयोजित होने वाले विषयवार टेस्ट की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया गया, लेकिन साथ ही इसे और अधिक सघन बनाने पर जोर दिया गया।
बैठक के दौरान यह महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई कि विद्यार्थियों को परीक्षा के मनोवैज्ञानिक दबाव से मुक्त करने और उनकी तैयारी को धार देने के लिए 'शेखावाटी मिशन-100' द्वारा तैयार किए गए मॉडल प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इतना ही नहीं, राजस्थान के विभिन्न जिलों के ख्याति प्राप्त और अनुभवी शिक्षकों द्वारा तैयार किए गए अभ्यास पत्रों को भी विशेष रूप से मंगवाया जा रहा है। अनिल पोरवाल और कमलेश तेतरवाल ने संयुक्त रूप से सभी संस्था प्रधानों को यह कड़ा निर्देश दिया कि वे बोर्ड के वास्तविक पैटर्न के अनुसार साप्ताहिक परीक्षाओं का आयोजन करें। इन परीक्षाओं की अवधि और वातावरण हूबहू मुख्य बोर्ड परीक्षा जैसा हो, ताकि विद्यार्थियों को उत्तर पुस्तिकाओं में समय प्रबंधन और प्रभावी लेखन का गहन अभ्यास हो सके।
जिला शिक्षा अधिकारी कमलेश तेतरवाल ने विद्यार्थियों की एक सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण समस्या पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कई छात्र उत्तरों को आत्मसात तो कर लेते हैं, लेकिन लेखन कौशल के अभाव में वे उसे सही ढंग से प्रस्तुत नहीं कर पाते। निरंतर अभ्यास ही उनकी इस कमी को दूर कर सकेगा। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए विशेष रणनीति का खुलासा करते हुए सीबीईओ को निर्देशित किया कि परीक्षा पूर्व अवकाश (तैयारी अवकाश) के दौरान छात्रों को केवल घर के भरोसे न छोड़ा जाए। इसके बजाय, उन्हें विद्यालयों में बुलाकर कठिन विषयों की विशेष कोचिंग दी जाए। शिक्षा के प्रति संवेदनशीलता का परिचय देते हुए तेतरवाल ने एक अनूठा सुझाव भी दिया कि जिन ग्रामीण विद्यार्थियों के पास घर पर पढ़ने के लिए उचित फर्नीचर नहीं है, उन्हें विद्यालय से स्टूल और टेबल उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वे एकाग्रता से पढ़ाई कर सकें।
इस पूरे अभियान की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिला कलेक्टर अंजली राजोरिया स्वयं इस मिशन की मॉनिटरिंग कर रही हैं। उन्होंने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि बोर्ड परिणाम सुधार के लिए किए जा रहे इन विशेष प्रयासों की प्रगति रिपोर्ट प्रत्येक सोमवार को उनके समक्ष प्रस्तुत की जाए। तकनीक का उपयोग करते हुए अब विद्यार्थियों, अभिभावकों और संस्था प्रधानों के व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर उन्हें निरंतर मार्गदर्शन और शैक्षणिक संबल प्रदान किया जा रहा है। प्रतापगढ़ का यह समन्वित प्रयास न केवल परीक्षा परिणामों को बेहतर बनाने की एक कवायद है, बल्कि यह जिले के हजारों विद्यार्थियों के सपनों को हकीकत में बदलने की एक ठोस प्रतिबद्धता है।

Pratahkal Bureau
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