प्रतापगढ़ पुलिस का 'ऑपरेशन चक्रव्यूह': नशे के साम्राज्य पर 133 करोड़ की चोट और 2026 के लिए आधुनिक पुलिसिंग का ब्लूप्रिंट
प्रतापगढ़ पुलिस ने वर्ष 2025 में 'ऑपरेशन चक्रव्यूह' के तहत 133 करोड़ रुपये का नशा जब्त कर तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त किया। पुलिस अधीक्षक बी आदित्य ने प्रेसवार्ता में 199 गिरफ्तारियों, 53 बंधकों की मुक्ति और साइबर सुरक्षा की सफलताओं का विवरण साझा किया। अब 2026 में डेटा और तकनीक आधारित आधुनिक पुलिसिंग से जिला और भी सुरक्षित बनेगा।

प्रतापगढ़। सीमावर्ती जिले प्रतापगढ़ में अपराध और अपराधियों के विरुद्ध छिड़ी जंग में वर्ष 2025 एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ है। गुरुवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित एक विशेष प्रेसवार्ता के दौरान पुलिस अधीक्षक बी आदित्य ने बीते वर्ष की उपलब्धियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हुए स्पष्ट कर दिया कि खाकी अब न केवल सख्त है, बल्कि तकनीक और जनसहभागिता से लैस होकर भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गजेन्द्र सिंह जोधा और उप पुलिस अधीक्षक गजेंद्र सिंह राव की गरिमामयी उपस्थिति ने पुलिस प्रशासन की एकजुटता और संकल्प को और मजबूती से प्रदर्शित किया।
पुलिस अधीक्षक बी आदित्य ने आंकड़ों के आईने में पुलिस की सफलता को रेखांकित करते हुए बताया कि वर्ष 2025 मादक पदार्थ तस्करों के लिए काल साबित हुआ। पुलिस ने नशीले पदार्थों के काले कारोबार पर प्रहार करते हुए कुल 110 प्रकरण दर्ज किए, जिनमें 199 तस्करों को सलाखों के पीछे भेजा गया। इस कार्रवाई के दौरान जब्त की गई सामग्री की फेहरिस्त चौंकाने वाली है, जिसमें 7020 किलोग्राम डोडाचूरा, 13.390 किलोग्राम अफीम, और भारी मात्रा में ब्राउन शुगर, एमडी पाउडर, गांजा व लिक्विड एमडीएम शामिल है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब्त किए गए इन मादक पदार्थों और तस्करी में प्रयुक्त 85 वाहनों की कुल कीमत 133 करोड़ 39 लाख रुपये से अधिक आंकी गई है। विशेष रूप से 29 जुलाई से शुरू हुए 'ऑपरेशन चक्रव्यूह' ने तस्करों की कमर तोड़ दी, जिसके अंतर्गत महज पांच महीनों में 77 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की गई।
पुलिसिंग का मानवीय चेहरा 'ऑपरेशन विश्वास' के रूप में सामने आया, जब प्रतापगढ़ पुलिस ने इंदौर में मजदूरी के नाम पर ठगे गए और महाराष्ट्र के शोलापुर में बंधक बनाए गए आदिवासी समुदाय के 53 निर्दोष लोगों को सुरक्षित मुक्त कराकर उनके घर पहुंचाया। सामाजिक सरोकारों को निभाते हुए 'ऑपरेशन सद्भावना' के जरिए थानों ने स्कूलों को गोद लिया और बच्चों के भविष्य को शिक्षा व जागरूकता से सींचा। वहीं, सोशल मीडिया पर दहशत फैलाने वाले स्टंटबाजों के खिलाफ 'ऑपरेशन पंजा' चलाकर 44 स्पोर्ट्स बाइक जब्त की गईं, जिससे सड़कों पर अनुशासन का संदेश गया। साइबर अपराध की चुनौतियों से निपटते हुए पुलिस ने न केवल 50 लाख रुपये की राशि पीड़ितों को वापस दिलाई, बल्कि तकनीकी निगरानी के जरिए सैकड़ों मोबाइल नंबर और आईएमईआई ब्लॉक कर अपराधियों के नेटवर्क को ध्वस्त किया।
भविष्य की ओर कदम बढ़ाते हुए पुलिस अधीक्षक ने वर्ष 2026 के लिए एक त्रिकोणीय रणनीति की घोषणा की। आगामी वर्ष में प्रतापगढ़ पुलिस 'डेटा बेस पॉलिसी' के तहत अपराधियों का डिजिटल खाका तैयार करेगी, 'टेक्नोलॉजिकल पॉलिसी' के माध्यम से पुलिसिंग को अत्याधुनिक स्वरूप प्रदान किया जाएगा और सामुदायिक पुलिसिंग के जरिए आमजन के बीच विश्वास की नई इबारत लिखी जाएगी। यह प्रेसवार्ता महज एक रिपोर्ट कार्ड नहीं थी, बल्कि अपराधियों को एक कड़ी चेतावनी और आम जनता को सुरक्षित भविष्य का भरोसा दिलाने वाला एक संकल्प पत्र था।

Dilip Sen, Pratapgarh
नाम: दिलीप सेन
वर्तमान पद: रिपोर्टर, जिला मुख्यालय (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: प्रतापगढ़ जिला (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): क्राइम, राजनीति, और धर्म-कर्म
परिचय
दिलीप सेन राजस्थान के प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय पर रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह मुख्य रूप से प्रतापगढ़ जिले और जिला मुख्यालय से जुड़े आपराधिक मामलों (क्राइम), स्थानीय राजनीति और धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों (धर्म-कर्म) की खबरों को कवर करते हैं। इन विषयों में उनकी विशेष रुचि और अच्छी पकड़ है।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
दिलीप सेन को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में विभिन्न प्रिंट और डिजिटल न्यूज़ चैनलों के साथ काम करने का अनुभव है। वह निम्नलिखित मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं:
- दैनिक भास्कर
- सीधा सवाल
- सच बेधड़क न्यूज़ चैनल
- प्रातः काल (जिसके साथ वह साल 2025 से निरंतर जुड़े हुए हैं)
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी शिक्षा 12वीं पास तक पूरी की है।
