प्रतापगढ़। राजस्थान के सीमावर्ती प्रतापगढ़ जिले में अवैध मादक पदार्थ तस्करी के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए पुलिस ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाया है। पुलिस अधीक्षक बी. आदित्य के कड़े तेवरों और 'जीरो टॉलरेंस' की नीति के तहत अरनोद थाना क्षेत्र के गांव देवल्दी में सघन छापेमारी की गई, जिससे तस्करी और अपराध की दुनिया में हड़कंप मच गया है। इस विशेष अभियान के दौरान पुलिस ने न केवल बिना नंबर की संदिग्ध मोटरसाइकिलों का जखीरा बरामद किया, बल्कि वांछित अपराधियों की धरपकड़ के लिए उनके ठिकानों को भी पूरी तरह से घेर लिया।

अरनोद क्षेत्र में तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गजेन्द्रसिंह जोधा और पुलिस उप अधीक्षक चन्द्रशेखर पालीवाल के नेतृत्व में विशेष टीमों का गठन किया गया था। कार्रवाई के दौरान देवल्दी गांव में अलग-अलग स्थानों पर अचानक दी गई दबिश ने संदिग्धों को संभलने का मौका तक नहीं दिया। मौके से पुलिस ने सात बिना नंबर की मोटरसाइकिलें जब्त की हैं, जिनका उपयोग संभवतः तस्करी की गतिविधियों में किया जा रहा था। इस दौरान जोधपुर निवासी अशोक पिता जियाराम (31 वर्ष) को शांति भंग करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। पुलिस की इस सक्रियता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अरनोद का दुर्गम क्षेत्र अब अपराधियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह नहीं रहा।

कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले अपराधियों की सूची लंबी है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अरनोद और आसपास के थानों में एनडीपीएस एक्ट, हत्या के प्रयास, मारपीट और फायरिंग जैसे संगीन मामलों में 18 खूंखार अपराधी लंबे समय से फरार चल रहे हैं। पुलिस ने इन सभी की कुंडली खंगालते हुए गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए हैं। इन वांछितों में याकुब, साहिल, शेरदिल उर्फ ददु, दशरथ, आसीफ, वाहिद खां, परवेज, शाहरुख, ईरान, शेर खान, जमशेद उर्फ सेठ लाल, आलम उर्फ सरफराज, अरबाज, शाहरुख उर्फ सरफराज खां, जावेद खां, कृष्ण उर्फ कारेश्वर डांगी और गुड्डा मीणा के नाम प्रमुखता से शामिल हैं। गौरतलब है कि इन फरार आरोपियों पर पुलिस ने 15 हजार से लेकर 50 हजार रुपये तक का नकद इनाम भी घोषित कर रखा है।

पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए इन वांछित अपराधियों के परिजनों को पाबंद किया है कि वे अपराधियों को पुलिस के समक्ष पेश करें, अन्यथा कठोर वैधानिक कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहें। पुलिस ने आमजन से भी सहयोग की अपील करते हुए आश्वस्त किया है कि सूचना देने वाले का नाम पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा और इनाम की राशि भी प्रदान की जाएगी। यह कार्रवाई केवल एक छापेमारी तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस का स्पष्ट संदेश है कि जब तक आखिरी वांछित अपराधी सलाखों के पीछे नहीं पहुंच जाता, दबिश और नाकाबंदी का यह सिलसिला अनवरत जारी रहेगा।

Dilip Sen, Pratapgarh

Dilip Sen, Pratapgarh

नाम: दिलीप सेन

वर्तमान पद: रिपोर्टर, जिला मुख्यालय (प्रातः काल)

कार्यक्षेत्र: प्रतापगढ़ जिला (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): क्राइम, राजनीति, और धर्म-कर्म

परिचय 

दिलीप सेन राजस्थान के प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय पर रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह मुख्य रूप से प्रतापगढ़ जिले और जिला मुख्यालय से जुड़े आपराधिक मामलों (क्राइम), स्थानीय राजनीति और धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों (धर्म-कर्म) की खबरों को कवर करते हैं। इन विषयों में उनकी विशेष रुचि और अच्छी पकड़ है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

दिलीप सेन को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में विभिन्न प्रिंट और डिजिटल न्यूज़ चैनलों के साथ काम करने का अनुभव है। वह निम्नलिखित मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं:

  • दैनिक भास्कर
  • सीधा सवाल
  • सच बेधड़क न्यूज़ चैनल
  • प्रातः काल (जिसके साथ वह साल 2025 से निरंतर जुड़े हुए हैं)

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने अपनी शिक्षा 12वीं पास तक पूरी की है।

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