प्रतापगढ़: कड़ाके की ठंड में बेसहारा लोगों का सहारा बने रैन बसेरे, आधी रात को जज साहब ने खुद परखीं व्यवस्थाएं
प्रतापगढ़ में सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अनुपालना में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव केदारनाथ ने रैन बसेरों का औचक निरीक्षण किया। कड़ाके की ठंड के बीच नगर परिषद, नीमच नाका और जिला अस्पताल के रैन बसेरों में व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं। निरीक्षण के दौरान खुले में सो रहे राहगीरों को आश्रय स्थल पहुंचाया गया और शिशुओं के लिए भोजन व सुरक्षा मानकों की जांच की गई।

भीषण शीतलहर और गिरते पारे के बीच जब लोग अपने घरों की गर्माहट में सिमटे हुए हैं, तब प्रतापगढ़ प्रशासन उन वंचितों की सुध ले रहा है जिनके सिर पर छत नहीं है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अक्षरशः पालना सुनिश्चित करने के लिए मंगलवार की रात न्यायपालिका स्वयं सड़क पर उतरी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश केदारनाथ ने रात 9 बजे शहर के विभिन्न रैन बसेरों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत जांची। इस निरीक्षण ने न केवल प्रशासनिक सतर्कता को उजागर किया, बल्कि मानवता की एक मिसाल भी पेश की जब खुले आसमान के नीचे ठिठुर रहे एक राहगीर को सम्मानपूर्वक छत मुहैया कराई गई।
निरीक्षण का सिलसिला नगर परिषद स्थित रैन बसेरे से शुरू हुआ, जहां न्यायाधीश केदारनाथ ने एक-एक व्यवस्था का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि राज्य सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप क्या वास्तव में जरूरतमंदों को वे सुविधाएं मिल रही हैं जिनकी उन्हें दरकार है। जांच के दौरान पाया गया कि महिलाओं और पुरुषों के लिए न केवल अलग-अलग ठहरने के पुख्ता इंतजाम हैं, बल्कि साफ-सफाई, शुद्ध पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा किट और कड़ाके की सर्दी से बचने के लिए पर्याप्त बिस्तर व कंबल भी उपलब्ध हैं। न्यायाधीश ने विशेष रूप से दो वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए शिशु-योग्य भोजन की उपलब्धता की जांच की और रिकॉर्ड रजिस्टरों का मिलान किया, जिसमें सभी व्यवस्थाएं सुचारू और संतोषजनक पाई गईं।
कर्तव्यपरायणता का यह सफर केवल नगर परिषद तक सीमित नहीं रहा। सचिव केदारनाथ ने इसके पश्चात नीमच नाका स्थित अस्थाई रैन बसेरे और जिला चिकित्सालय परिसर में संचालित रैन बसेरे का भी सघन निरीक्षण किया। इस दौरान एक भावुक कर देने वाला दृश्य तब सामने आया जब बस स्टैंड पर खुले में सो रहे एक राहगीर को न्यायाधीश के निर्देश पर तत्काल नगर परिषद रैन बसेरे में स्थानांतरित किया गया। रैन बसेरा स्टाफ ने बताया कि वे निरंतर प्रचार-प्रसार कर रहे हैं ताकि कोई भी व्यक्ति इस हाड़ कपा देने वाली ठंड में खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर न हो। न्यायपालिका की इस सक्रियता ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के अधिकारों और सुरक्षा के प्रति तंत्र पूरी तरह सजग है।

Pratahkal Bureau
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