प्रतापगढ़: नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की सलाखों के पीछे भेजा, पोक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला
प्रतापगढ़ पोक्सो कोर्ट के न्यायाधीश डॉ. प्रभात अग्रवाल ने नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी पिंकु उर्फ पिकेंश मीणा को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। रतलाम निवासी आरोपी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। लोक अभियोजक किशन लाल कुमावत की प्रभावी पैरवी से मासूम को न्याय मिला और कानून का खौफ अपराधियों में कायम हुआ।

प्रतापगढ़। राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले से न्याय की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने समाज में बेटियों की सुरक्षा को लेकर एक कड़ा संदेश दिया है। यहाँ की विशेष न्यायाधीश (पोक्सो एक्ट) अदालत ने एक नाबालिग मासूम का अपहरण कर उसकी अस्मत से खिलवाड़ करने वाले दरिंदे को उसके किए की ऐसी सजा सुनाई कि वह अब अपनी जवानी के अगले दो दशक जेल की कालकोठरी में काटेगा। न्यायाधीश डॉ. प्रभात अग्रवाल ने आरोपी को न केवल 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई, बल्कि उस पर भारी अर्थदण्ड भी लगाया है।
इस रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले की शुरुआत 6 जुलाई 2024 की काली रात को हुई थी। पीड़ित परिवार अपनी दुनिया में मगन था और उनकी नाबालिग पुत्री घर के बाहर बने परसाल में सो रही थी। सुबह जब उजाला हुआ तो पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई, क्योंकि उनकी बेटी वहां मौजूद नहीं थी। बदहवास परिजन उसे हर जगह तलाश रहे थे, तभी परिवादी के छोटे पुत्र के मोबाइल पर एक फोन आया। फोन करने वाला कोई और नहीं, बल्कि आरोपी पिंकु उर्फ पिकेंश पिता लक्ष्मण मीणा था। रतलाम जिले के सैलाना क्षेत्र के लक्ष्मणगढ़ का रहने वाला 23 वर्षीय यह युवक फोन पर बेशर्मी से अपनी करतूत कुबूल कर रहा था। उसने साफ लफ्जों में कहा कि वह नाबालिग को उठाकर ले आया है और अब उसे अपनी पत्नी बनाकर रखे हुए है।
पुलिस ने इस संगीन मामले की गंभीरता को समझते हुए त्वरित कार्रवाई की और अनुसंधान पूर्ण कर चार्जशीट अदालत में पेश की। अदालत के भीतर न्याय की यह लड़ाई विशेष लोक अभियोजक किशन लाल कुमावत ने लड़ी। उन्होंने अभियोजन पक्ष की ओर से मजबूती के साथ 17 गवाहों के बयान दर्ज कराए और 37 महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य पेश कर आरोपी के गुनाहों की कड़ियां जोड़ीं। साक्ष्यों और गवाहों की गूंज के बीच आरोपी पिंकु उर्फ पिकेंश का अपराध पूरी तरह सिद्ध हो गया।
माननीय न्यायालय ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पोक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत कड़ी सजा सुनाई। न्यायाधीश डॉ. प्रभात अग्रवाल ने धारा 137(2) BNS में 3 वर्ष, धारा 87 BNS में 7 वर्ष, और धारा 127(4) BNS में 2 वर्ष के कारावास के साथ-साथ धारा 65(1) BNS सहपठित धारा 3/4(2) पोक्सो एक्ट और धारा 64(2)(उ) BNS सहपठित धारा 5(स)/6 पोक्सो एक्ट के तहत 20-20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा दोषी पर कुल 50 हजार रुपये का अर्थदण्ड भी लगाया गया है। यह फैसला उन तमाम अपराधियों के लिए एक चेतावनी है जो कानून और मासूमियत को कुचलने का दुस्साहस करते हैं। राज्य पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी ने अंततः एक पीड़ित परिवार को वह न्याय दिलाया जिसका वे महीनों से इंतजार कर रहे थे।

Pratahkal Bureau
प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
