प्रतापगढ़ शहर में गणगौर पर्व के अवसर पर श्रद्धा, परंपरा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार कर शिव-पार्वती की पूजा के लिए मंदिरों में पहुंचीं, जहां पूरे विधि-विधान के साथ ईसर-पार्वती की आराधना की गई।

मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब

शहर के पालीवाल गली मंदिर, मोची गली गोपालगंज मंदिर और राजराजेश्वरी अंबा माता मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने कुमकुम, चावल, हल्दी, मेहंदी, गुलाल और अबीर से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना की।

अखंड सौभाग्य और योग्य वर की कामना

विवाहित महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखा, वहीं कुंवारी कन्याओं ने योग्य वर की प्राप्ति के लिए गणगौर की पूजा की। मंदिर परिसरों में पारंपरिक गीतों की गूंज और पूजा-अर्चना के बीच भक्ति का माहौल पूरे दिन बना रहा। गणगौर पर्व, जो होली के बाद शुरू होकर 16 दिनों तक चलता है, महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दौरान महिलाएं निरंतर पूजा-अर्चना कर परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं और तीज के दिन व्रत का उद्यापन किया जाता है।

सवारी और लोक परंपराओं का संगम

शाम के समय विभिन्न समाजों की महिलाओं द्वारा ढोल-नगाड़ों के साथ ईसर-गणगौर की सवारी निकालने की तैयारियां भी जोरों पर रहीं। शहर में हर ओर भक्ति, रंग और लोक परंपराओं का सुंदर समन्वय देखने को मिला, जिसने गणगौर पर्व को और भी खास बना दिया।

Pratahkal Bureau

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