प्रतापगढ़। जिले के बारावरदा क्षेत्र स्थित उड़ा खोरा के जंगलों में सोमवार रात भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। वनाग्नि इतनी भयावह थी कि धुएं के गुबार और आग की ऊंची लपटें राष्ट्रीय राजमार्ग-56 से स्पष्ट रूप से दिखाई दीं। पवन ऊर्जा संयंत्रों के समीप फैले इस वन क्षेत्र में आग ने विकराल रूप धारण करते हुए तेजी से प्रसार किया, जिसके चलते करीब एक किलोमीटर दूर तक लपटों का तांडव नजर आया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस भीषण अग्निकांड ने जंगल के एक बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे हजारों की संख्या में पेड़-पौधे जलकर खाक हो गए हैं। वन संपदा के साथ-साथ यहां निवास करने वाले वन्यजीव, पशु-पक्षी और अन्य जीव-जंतुओं के अस्तित्व पर भी गहरा संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय ग्रामीणों ने इस आपदा के पीछे मानवीय लापरवाही और अंधविश्वास को मुख्य कारण बताया है। ग्रामीणों का तर्क है कि प्रतिवर्ष कुछ लोगों द्वारा अज्ञानता वश लगाई जाने वाली यह आग पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुंचा रही है।

घटना के बाद स्थानीय निवासियों में प्रशासन और वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गहरा रोष व्याप्त है। ग्रामीणों ने विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि वनाग्नि की पुनरावृत्ति होने के बावजूद अब तक कोई ठोस निरोधात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। बढ़ती गर्मी के बीच जंगलों में भड़कती आग वन संपदा के लिए विनाशकारी सिद्ध हो रही है। क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि आग लगाने वाले असामाजिक तत्वों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने हेतु जंगलों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं।

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Pratahkal HQ

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