प्रतापगढ़। रंगों के त्योहार होली को पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए वन विभाग की ओर से इस वर्ष हर्बल गुलाल तैयार करवाई गई है। यह गुलाल वन क्षेत्र में मिलने वाले पलाश और अन्य पेड़-पौधों के फूलों से तैयार की गई है, जिसे रंग तेरस के अवसर पर आमजन के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।

वन सुरक्षा समितियों के माध्यम से संग्रहण और निर्माण

वन विभाग के अनुसार वन सुरक्षा समितियों के माध्यम से पिछले एक पखवाड़े से वन क्षेत्र से आवश्यक कच्ची सामग्री एकत्रित कराई गई। इसके बाद समितियों द्वारा प्राकृतिक फूलों और वनौपज से हर्बल गुलाल तैयार की गई है। विभाग की ओर से इसे आमजन के लिए बिक्री के लिए भी उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि लोग रासायनिक रंगों के स्थान पर प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर सकें। जिले के वन क्षेत्रों में वनौपज पर्याप्त मात्रा में पाई जाती है, जिसे ध्यान में रखते हुए वन विभाग द्वारा वन सुरक्षा समितियों के माध्यम से विभिन्न उपयोगी उत्पाद तैयार करवाने की पहल की जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं।

विक्रय केंद्र का उद्घाटन और उपलब्धता

धरियावद नाका स्थित वन विभाग के विक्रय केंद्र पर हर्बल गुलाल की बिक्री की व्यवस्था की गई है। इस विक्रय केंद्र का उद्घाटन उपवन संरक्षक सुरेश कुमार अग्रवाल ने किया। उपवन संरक्षक ने बताया कि इस वर्ष प्रतापगढ़ वन सुरक्षा समिति द्वारा 50 किलो, लसाडिया वन सुरक्षा समिति द्वारा दो क्विंटल तथा पीपलखूंट क्षेत्र में 25 किलो हर्बल गुलाल तैयार की गई है।

विभागीय अधिकारियों की उपस्थिति

"इस अवसर पर एसीएफ दिलीप सिंह, नाका प्रभारी दीपक मीणा सहित वन विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।"

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Pratahkal Bureau

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