राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में अन्नदाताओं की सुलगती समस्याओं को लेकर भारतीय किसान संघ ने हुंकार भरी है। भारतीय किसान संघ के बैनर तले एकत्रित हुए सैकड़ों किसानों ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें कृषि जगत से जुड़ी ज्वलंत समस्याओं के त्वरित निस्तारण की पुरजोर वकालत की गई। इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन के माध्यम से किसानों ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण क्षेत्रों में असंतोष गहरा सकता है।

ज्ञापन के माध्यम से किसानों ने प्रमुखता से मांग उठाई कि गेहूं खरीद की वर्तमान अंतिम तिथि को विस्तारित कर 30 जून 2026 तक किया जाए, ताकि क्षेत्र का प्रत्येक किसान अपनी उपज को सरकारी केंद्रों पर सुगमता से बेच सके। किसानों ने जल वितरण की विसंगतियों पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए बताया कि माही डैम का मुख्य जल स्रोत प्रतापगढ़ और अरनोद क्षेत्र होने के बावजूद, स्थानीय किसानों के खेत आज भी प्यासे हैं। अब तक लिफ्ट कैनाल के माध्यम से सिंचाई का पानी इन क्षेत्रों तक नहीं पहुंचाया गया है, जो कि क्षेत्र के विकास के साथ एक बड़ा अन्याय है।

आर्थिक मोर्चे पर किसानों की नाराजगी वर्ष 2025 की खरीफ फसल के दौरान हुई अतिवृष्टि के मुआवजे को लेकर भी फूटी। किसानों का कहना है कि भारी वर्षा से हुई तबाही के बावजूद अब तक उन्हें कोई वित्तीय राहत नहीं मिली है। इसके अतिरिक्त, कृषि मंडी प्रतापगढ़ और अरनोद में गेहूं खरीद की वर्तमान क्षमता को अपर्याप्त बताते हुए इसे बढ़ाने की मांग की गई है, ताकि पंजीकृत सभी किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं की शत-प्रतिशत खरीद सुनिश्चित हो सके। ज्ञापन में वित्तीय सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए वर्ष 2024 की लंबित तीन बीमा किस्तों और वर्ष 2025 खरीफ की अतिवृष्टि बीमा राशि का अविलंब भुगतान करने की मांग को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर संगठन की शक्ति का प्रदर्शन करते हुए संभाग संरक्षक कर्नल जयराज सिंह, प्रांत जैविक प्रमुख गोपाल खटवड़, संभाग बीज प्रमुख पन्नालाल डांगी, युवा प्रमुख बादल, जिला प्रचार प्रमुख सागर प्रजापति, अरनोद तहसील अध्यक्ष झमकलाल डांगी तथा संभाग आमंत्रित सदस्य दिगपाल सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान प्रतिनिधि उपस्थित रहे। किसानों का यह संगठित प्रयास न केवल उनकी जीविका की रक्षा के लिए है, बल्कि शासन-प्रशासन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जमीनी सच्चाई से रूबरू कराने का एक सशक्त माध्यम भी बना है।

Pratahkal Bureau

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