ट्रैक्टर की किस्त चुकाने के लिए देवर-देवरानी बने कातिल, मां-बेटी हत्याकांड का खुलासा
फाइनेंस की किस्त चुकाने के लिए आरोपी बाबूलाल और उसकी पत्नी ने कुल्हाड़ी से वार कर मां-बेटी की हत्या की थी और चांदी के कड़े लूट लिए थे।

प्रतापगढ़ में मां-बेटी हत्याकांड का खुलासा करने के बाद देवगढ़ थाना पुलिस अधिकारियों के साथ प्रेस वार्ता करते जिला पुलिस अधीक्षक बी. आदित्य और अन्य पुलिसकर्मी।
प्रतापगढ़ जिले के देवगढ़ थाना क्षेत्र स्थित सीतामाता अभयारण्य के भोपाखेड़ा पाल गांव में हुए सनसनीखेज मां-बेटी हत्याकांड और लूट की वारदात का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। मामले में मृतका के देवर बाबूलाल मीणा और उसकी पत्नी गेंदाबाई को गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आर्थिक तंगी और ट्रैक्टर की फाइनेंस किस्त चुकाने के लिए दोनों ने इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया।
जिला पुलिस अधीक्षक बी. आदित्य ने प्रेस वार्ता में बताया कि मामले की गहन जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी बाबूलाल और गेंदाबाई मृतका मानकी मीणा के रिश्ते में देवर और देवरानी लगते हैं। पुलिस के अनुसार, 28 मई की रात मानकी मीणा और उसकी पुत्री कला उर्फ कमला घर के आंगन में एक ही खाट पर सो रही थीं। अगले दिन सुबह परिवार की सदस्य लाली घर पहुंची तो दोनों को लहूलुहान अवस्था में पाया। कला की मौके पर ही मृत्यु हो चुकी थी, जबकि गंभीर रूप से घायल मानकी को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। बाद में उदयपुर में इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया।
घटनास्थल पर घर का मुख्य दरवाजा और पेटी के ताले टूटे हुए मिले तथा सामान बिखरा पड़ा था, जिससे लूटपाट की आशंका भी सामने आई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एफएसएल, एमओबी, डॉग स्क्वॉड और साइबर टीम की सहायता से जांच शुरू की। सीतामाता अभयारण्य के दुर्गम और डार्क जोन क्षेत्र में हुई इस वारदात के खुलासे के लिए अलग-अलग टीमें गठित कर राजस्थान और गुजरात के विभिन्न क्षेत्रों में संदिग्धों की तलाश की गई।
जांच के दौरान तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र से मिले महत्वपूर्ण सुरागों के आधार पर 11 जून को पुलिस को सूचना मिली कि एक संदिग्ध व्यक्ति सीतामाता के जंगल क्षेत्र में छिपा हुआ है। घेराबंदी कर पुलिस ने बाबूलाल मीणा को हिरासत में लिया। तकनीकी और मनोवैज्ञानिक पूछताछ में उसने अपनी पत्नी गेंदाबाई के साथ मिलकर हत्या और लूट की वारदात को अंजाम देने की बात स्वीकार कर ली। इसके बाद पुलिस ने गेंदाबाई को भी गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि बाबूलाल ने कुछ समय पूर्व एक सेकेंड हैंड सोनालिका ट्रैक्टर खरीदा था, जिसकी कीमत 2.55 लाख रुपये तय हुई थी। फाइनेंस की किस्तें जमा करने के लिए पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण दोनों ने मानकी के घर से सोने-चांदी के आभूषण और नकदी लूटने की योजना बनाई। योजना के तहत दोनों आरोपी कुल्हाड़ी और छुरी लेकर रात में घर पहुंचे और सो रही मां-बेटी पर हमला कर दिया। हमले में कला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि मानकी गंभीर रूप से घायल हो गई।
वारदात के बाद आरोपियों ने मानकी के हाथों में पहने चांदी के कड़े निकाल लिए तथा घर का ताला तोड़कर नकदी भी चोरी कर ली। जांच में यह भी सामने आया कि चोरी किए गए चांदी के कड़े बेचकर प्राप्त राशि फाइनेंस कंपनी में जमा करवाई गई थी।
पुलिस के अनुसार, वारदात के बाद दोनों आरोपी गांव में सामान्य जीवन जीते रहे और संदेह से बचने के लिए अन्य ग्रामीणों के साथ घटनास्थल पर भी पहुंचे। इस दौरान उन्होंने पुलिस और ग्रामीणों को गुमराह करने का प्रयास किया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर रिमांड प्राप्त कर लिया है। मामले में प्रयुक्त हथियारों और अन्य साक्ष्यों की बरामदगी के लिए जांच जारी है।
गिरफ्तार आरोपियों में बाबूलाल मीणा (25) पुत्र राजिया मीणा तथा उसकी पत्नी गेंदाबाई (22) निवासी भोपाखेड़ा पाल, थाना देवगढ़, जिला प्रतापगढ़ शामिल हैं। इस खुलासे ने न केवल दोहरे हत्याकांड की गुत्थी सुलझाई है, बल्कि यह भी उजागर किया है कि आर्थिक दबाव और लालच किस तरह रिश्तों की बुनियाद को भी तार-तार कर सकते हैं।

Pratahkal Bureau
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