प्रतापगढ़: रैन बसेरा में इंसानों की जगह कुत्तों का कब्जा, न्यायाधीश के औचक निरीक्षण में खुली नगर परिषद के दावों की पोल
प्रतापगढ़ में रैन बसेरा की बदहाली पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश केदारनाथ ने कड़ा रुख अपनाया है। निरीक्षण में बिस्तर पर कुत्तों का कब्जा और बुनियादी सुविधाओं का अभाव मिलने पर नगर परिषद की लापरवाही उजागर हुई। जानिए कैसे अदालती सख्ती ने खोली प्रशासन के दावों की पोल और क्या दिए गए निर्देश।

प्रतापगढ़। कड़कड़ाती ठंड में गरीबों और बेसहारा लोगों को छत मुहैया कराने के दावों के बीच प्रतापगढ़ नगर परिषद की एक शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। जहाँ एक ओर प्रशासन मुस्तैद होने का ढोंग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जिला मुख्यालय स्थित रैन बसेरा आवारा कुत्तों का सुरक्षित ठिकाना बन चुका है। यह हकीकत तब उजागर हुई जब अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, केदारनाथ ने औचक निरीक्षण किया। न्यायाधीश की सख्ती और वहां के बदहाल मंजर ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
निरीक्षण के दौरान रैन बसेरे के भीतर का दृश्य विचलित करने वाला था। जिस बिस्तर पर ठिठुरते हुए किसी बेसहारा व्यक्ति को आराम मिलना चाहिए था, वहां आवारा कुत्तों का डेरा जमा हुआ था। नगर परिषद द्वारा संचालित यह रैन बसेरा महज एक औपचारिकता बनकर रह गया है। यहाँ न तो शुद्ध पेयजल की व्यवस्था मिली और न ही प्राथमिक उपचार के लिए कोई फर्स्ट एड बॉक्स। सबसे बड़ी लापरवाही सुरक्षा व्यवस्था और स्वच्छता को लेकर दिखी, जहाँ महिला एवं पुरुष लाभार्थियों के लिए अलग-अलग शौचालयों तक का प्रबंध नहीं पाया गया। बदहाली का आलम यह था कि रैन बसेरा होने के बावजूद यहाँ बुनियादी सुविधाओं का नामोनिशान तक नहीं था।
न्यायाधीश केदारनाथ ने इस अमानवीय स्थिति और व्यवस्थाओं के अभाव पर गहरा रोष व्यक्त किया। उन्होंने नगर परिषद को आड़े हाथों लेते हुए स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कड़े निर्देश हैं कि शीत लहर के दौरान किसी भी व्यक्ति की जान ठंड के कारण नहीं जानी चाहिए। न्यायाधीश ने सख्त लहजे में कहा कि रैन बसेरे सिर्फ कागजों पर या नाम मात्र के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक रूप से सुरक्षित और उपयोगी होने चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को तुरंत साफ-सफाई, शौचालय, पेयजल और पुख्ता सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश जारी किए।
इस निरीक्षण ने न केवल जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की घोर उदासीनता को उजागर किया है, बल्कि यह भी दर्शाया है कि सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन धरातल पर कितना खोखला है। रैन बसेरे में व्याप्त यह अव्यवस्था प्रशासन की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। अब देखना यह होगा कि न्यायालय की इस फटकार के बाद नगर परिषद की कुंभकर्णी नींद टूटती है या बेसहारा लोग इसी तरह खुले आसमान और कुत्तों के साए में रात बिताने को मजबूर रहेंगे।

Dilip Sen, Pratapgarh
नाम: दिलीप सेन
वर्तमान पद: रिपोर्टर, जिला मुख्यालय (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: प्रतापगढ़ जिला (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): क्राइम, राजनीति, और धर्म-कर्म
परिचय
दिलीप सेन राजस्थान के प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय पर रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह मुख्य रूप से प्रतापगढ़ जिले और जिला मुख्यालय से जुड़े आपराधिक मामलों (क्राइम), स्थानीय राजनीति और धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों (धर्म-कर्म) की खबरों को कवर करते हैं। इन विषयों में उनकी विशेष रुचि और अच्छी पकड़ है।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
दिलीप सेन को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में विभिन्न प्रिंट और डिजिटल न्यूज़ चैनलों के साथ काम करने का अनुभव है। वह निम्नलिखित मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं:
- दैनिक भास्कर
- सीधा सवाल
- सच बेधड़क न्यूज़ चैनल
- प्रातः काल (जिसके साथ वह साल 2025 से निरंतर जुड़े हुए हैं)
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी शिक्षा 12वीं पास तक पूरी की है।
