प्रतापगढ़: छात्रावासों के संविदा कर्मियों का छलका दर्द, महीनों से वेतन न मिलने पर कलक्टर की चौखट पर दी दस्तक
प्रतापगढ़ जिले के विभिन्न छात्रावासों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों ने समय पर वेतन न मिलने के कारण जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपना विरोध दर्ज कराया। तीन-चार महीने से लंबित वेतन और बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों ने मानदेय बढ़ाकर 500 रुपये प्रतिदिन करने की मांग की है। जानिए कैसे आर्थिक संकट ने संविदा कर्मियों के परिवारों को मुश्किल में डाल दिया है।

प्रतापगढ़। राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में सरकारी व्यवस्थाओं की धुरी कहे जाने वाले छात्रावासों के संविदा कर्मचारियों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया है। पिछले कई महीनों से वेतन की बाट जोह रहे इन कर्मचारियों के चूल्हे अब बुझने की कगार पर पहुँच गए हैं। आर्थिक तंगी और मानसिक अवसाद से जूझते दर्जनों संविदा कर्मियों ने आज लामबंद होकर जिला कलक्टर कार्यालय का घेराव किया और अपनी व्यथा को ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन के समक्ष रखा। इस प्रदर्शन ने छात्रावास प्रबंधन और श्रम अधिकारों की अनदेखी की एक गंभीर तस्वीर पेश की है।
घटनाक्रम के अनुसार, जिले के विभिन्न छात्रावासों में अपनी सेवाएँ दे रहे इन कर्मचारियों को पिछले तीन से चार महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने कलक्टर को बताया कि वेतन में होने वाली यह अत्यधिक देरी उनके जीवन को नारकीय बना रही है। बिना किसी वैकल्पिक आय के स्रोत के, इन संविदा कर्मियों के लिए अपने परिवार का भरण-पोषण करना, बच्चों की स्कूल फीस भरना और दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। स्थिति इतनी विकट है कि कई कर्मचारी अब कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं।
ज्ञापन के माध्यम से कर्मचारियों ने न केवल नियमित वेतन की मांग की, बल्कि वर्तमान में मिल रहे अल्प मानदेय पर भी गहरा रोष व्यक्त किया। कर्मचारियों का तर्क है कि आसमान छूती महंगाई के इस दौर में वर्तमान मानदेय ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। उन्होंने सरकार और जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि उनके दैनिक मानदेय को बढ़ाकर कम से कम 500 रुपये किया जाए। यह मांग केवल आर्थिक नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण बताई जा रही है, ताकि ये कर्मी सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सकें।
इस विरोध प्रदर्शन ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनके बकाया वेतन का अविलंब भुगतान नहीं किया गया और भविष्य में समय पर मानदेय सुनिश्चित करने की व्यवस्था नहीं की गई, तो उन्हें और भी कड़े कदम उठाने के लिए विवश होना पड़ेगा। जिला कलक्टर ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए संबंधित विभाग को इस मामले की जांच करने और जल्द से जल्द समाधान के निर्देश देने का आश्वासन दिया है। अब देखना यह होगा कि व्यवस्था की सुस्ती का दंश झेल रहे इन 'कोरोना वॉरियर्स' और 'कर्मवीरों' को न्याय कब तक मिल पाता है।

Dilip Sen, Pratapgarh
नाम: दिलीप सेन
वर्तमान पद: रिपोर्टर, जिला मुख्यालय (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: प्रतापगढ़ जिला (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): क्राइम, राजनीति, और धर्म-कर्म
परिचय
दिलीप सेन राजस्थान के प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय पर रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह मुख्य रूप से प्रतापगढ़ जिले और जिला मुख्यालय से जुड़े आपराधिक मामलों (क्राइम), स्थानीय राजनीति और धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों (धर्म-कर्म) की खबरों को कवर करते हैं। इन विषयों में उनकी विशेष रुचि और अच्छी पकड़ है।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
दिलीप सेन को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में विभिन्न प्रिंट और डिजिटल न्यूज़ चैनलों के साथ काम करने का अनुभव है। वह निम्नलिखित मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं:
- दैनिक भास्कर
- सीधा सवाल
- सच बेधड़क न्यूज़ चैनल
- प्रातः काल (जिसके साथ वह साल 2025 से निरंतर जुड़े हुए हैं)
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी शिक्षा 12वीं पास तक पूरी की है।
