प्रतापगढ़। ग्रामीण भारत की जीवनरेखा मानी जाने वाली मनरेगा योजना पर मंडराते संकट को लेकर प्रतापगढ़ की सियासत गरमा गई है। केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा इस महत्वाकांक्षी योजना को कथित तौर पर कमजोर करने की कोशिशों के खिलाफ कांग्रेस ने अब आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। शनिवार को सर्किट हाउस परिसर में आयोजित जिला कांग्रेस कमेटी की प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने तीखे तेवर अपनाते हुए स्पष्ट किया कि गरीब और मजदूर के हक पर किसी भी तरह का प्रहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कांग्रेस ने इसे केवल एक नीतिगत बदलाव नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के अस्तित्व पर सीधा हमला करार दिया है।

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष हंगामीलाल मेवाड़ा ने केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि मनरेगा कोई खैरात या सरकारी मेहरबानी नहीं है, बल्कि यह देश के ग्रामीण गरीबों का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस की यूपीए सरकार ने इस कानून के जरिए करोड़ों परिवारों को सम्मान के साथ काम की गारंटी दी थी। मेवाड़ा ने आरोप लगाया कि वर्तमान भाजपा सरकार बजट में लगातार कटौती, भुगतान में जानबूझकर की जा रही देरी और योजना के स्वरूप को बदलने की राजनीति कर इसे धीरे-धीरे समाप्त करने की साजिश रच रही है। उनके अनुसार, सरकार की यह मजदूर विरोधी सोच केवल पूंजीपतियों के हितों को साधने के लिए है।

प्रेस वार्ता के दौरान जिला कांग्रेस अध्यक्ष भानुप्रताप सिंह राणावत ने भी केंद्र पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की प्राथमिकता जनहित के बजाय केवल नाम बदलने की राजनीति तक सीमित रह गई है। राणावत ने चेतावनी देते हुए कहा कि महात्मा गांधी का नाम योजना से हटाने की कोई भी सोच देश की ऐतिहासिक विरासत और गांव के गरीबों का अपमान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बापू के नाम से जुड़ी इस योजना की अस्मिता के साथ कोई भी छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कांग्रेस नेताओं ने आंकड़ों के साथ बताया कि बजट की कमी के कारण मजदूरों को महीनों तक पारिश्रमिक नहीं मिल रहा है, वहीं तकनीकी जटिलताओं और ऑनलाइन हाजिरी की समस्याओं ने मजदूरों की कमर तोड़ दी है, जिससे गांवों में बेरोजगारी और पलायन की स्थिति फिर से गंभीर हो रही है।

कांग्रेस ने इस प्रेस वार्ता के माध्यम से केंद्र सरकार के समक्ष अपनी मांगों का चार्टर भी रखा। पार्टी ने मनरेगा के बजट को बढ़ाकर दो लाख करोड़ रुपये करने, कार्य दिवसों की संख्या 100 से बढ़ाकर 150 करने, 15 दिनों के भीतर अनिवार्य भुगतान सुनिश्चित करने और तकनीकी नियमों के सरलीकरण की पुरजोर मांग की है। इसी कड़ी में आंदोलन की अगली रूपरेखा पेश करते हुए नेताओं ने घोषणा की कि 11 जनवरी को प्रतापगढ़ के महात्मा गांधी चौराहे पर एक दिवसीय शांतिपूर्ण उपवास और विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। कांग्रेस का यह कदम न केवल एक राजनीतिक विरोध है, बल्कि उन लाखों परिवारों की रसोई और रोटी को बचाने का संघर्ष है जिनका जीवन आज भी मनरेगा की दिहाड़ी पर निर्भर है।

Dilip Sen, Pratapgarh

Dilip Sen, Pratapgarh

नाम: दिलीप सेन

वर्तमान पद: रिपोर्टर, जिला मुख्यालय (प्रातः काल)

कार्यक्षेत्र: प्रतापगढ़ जिला (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): क्राइम, राजनीति, और धर्म-कर्म

परिचय 

दिलीप सेन राजस्थान के प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय पर रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह मुख्य रूप से प्रतापगढ़ जिले और जिला मुख्यालय से जुड़े आपराधिक मामलों (क्राइम), स्थानीय राजनीति और धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों (धर्म-कर्म) की खबरों को कवर करते हैं। इन विषयों में उनकी विशेष रुचि और अच्छी पकड़ है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

दिलीप सेन को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में विभिन्न प्रिंट और डिजिटल न्यूज़ चैनलों के साथ काम करने का अनुभव है। वह निम्नलिखित मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं:

  • दैनिक भास्कर
  • सीधा सवाल
  • सच बेधड़क न्यूज़ चैनल
  • प्रातः काल (जिसके साथ वह साल 2025 से निरंतर जुड़े हुए हैं)

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने अपनी शिक्षा 12वीं पास तक पूरी की है।

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