प्रतापगढ़ के छोटी सादड़ी में मौखिक आदेश से माइंस बंद, गहराया रोजगार संकट
खनिज विभाग के नियमों और मौखिक आदेश के विरोध में छोटी सादड़ी में माइंस संचालकों की बैठक, सरकार से काम दोबारा शुरू कराने की मांग की।

प्रतापगढ़ के छोटी सादड़ी उपखंड में कथित मौखिक आदेश के बाद बंद हुई खदानों को पुनः शुरू कराने की मांग को लेकर बैठक में चर्चा करते स्थानीय माइंस संचालक और कारोबारी।
प्रतापगढ़ जिले के छोटी सादड़ी क्षेत्र में अधिकांश माइंस 2 जून को जारी कथित मौखिक आदेशों के बाद बंद हो गई हैं, जिससे क्षेत्र में बेरोज़गारी और आर्थिक संकट गहरा गया है। खनन गतिविधियां ठप होने से हजारों मजदूर, ट्रैक्टर चालक, मशीन ऑपरेटर और अन्य श्रमिक सीधे प्रभावित हुए हैं, जबकि उनके परिवारों के सामने भी रोज़ी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए छोटी सादड़ी उपखंड मुख्यालय पर माइंस संचालकों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में छोटे और मध्यम खनन व्यवसायियों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर बंद पड़ी माइंस को पुनः चालू कराने की मांग उठाई।
बैठक में उपस्थित संचालकों ने बताया कि खनिज विभाग के बढ़ते नियम, जटिल प्रक्रियाएं और प्रशासनिक दबाव छोटे खनन कारोबारियों के लिए संचालन को लगातार कठिन बना रहे हैं। उनका कहना था कि कई माइंस बंद होने के कारण स्थानीय मजदूर वर्ग के सामने आजीविका का संकट उत्पन्न हो गया है।
माइंस संचालकों ने आरोप लगाया कि प्रशासन और बड़े खनन क्षेत्र में चल रही माइंस संचालक कंपनियां छोटे माइंस कर्मियों को परेशान करती हैं तथा बिना पूर्व नोटिस के माइंस बंद करवा देती हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई से छोटे खनन व्यवसायियों और उनसे जुड़े श्रमिकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
मजदूरों ने भी अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि खनन कार्य बंद होने से उनके परिवार आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। कई परिवार रोजगार की तलाश में अन्य क्षेत्रों की ओर पलायन करने को मजबूर हो गए हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो आर्थिक संकट और अधिक गंभीर हो जाएगा।
माइंस संचालकों ने सरकार से मांग की कि खनन क्षेत्र से जुड़े नियमों को सरल बनाया जाए तथा छोटे कारोबारियों को राहत प्रदान की जाए। उनका कहना है कि इससे रोजगार के अवसर सृजित होंगे और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां पुनः पटरी पर लौट सकेंगी।
स्थानीय व्यापारियों और मजदूरों ने भी बताया कि माइंस संचालन में आई रुकावट का असर केवल प्रत्यक्ष रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवहन, मशीनरी, ईंधन और अन्य सहायक उद्योग भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। इससे पूरे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों पर व्यापक असर पड़ रहा है।
बैठक में यह निष्कर्ष निकला कि प्रशासन के साथ संवाद स्थापित कर समस्या का शीघ्र समाधान किया जाना आवश्यक है। संचालकों का कहना है कि यदि सरकार समय रहते उचित कदम उठाती है तो माइंस संचालन पुनः शुरू हो सकता है और हजारों परिवारों की रोज़ी-रोटी बचाई जा सकती है। क्षेत्र के लोगों की निगाहें अब सरकार और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

Dilip Sen, Pratapgarh
नाम: दिलीप सेन
वर्तमान पद: रिपोर्टर, जिला मुख्यालय (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: प्रतापगढ़ जिला (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): क्राइम, राजनीति, और धर्म-कर्म
परिचय
दिलीप सेन राजस्थान के प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय पर रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह मुख्य रूप से प्रतापगढ़ जिले और जिला मुख्यालय से जुड़े आपराधिक मामलों (क्राइम), स्थानीय राजनीति और धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों (धर्म-कर्म) की खबरों को कवर करते हैं। इन विषयों में उनकी विशेष रुचि और अच्छी पकड़ है।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
दिलीप सेन को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में विभिन्न प्रिंट और डिजिटल न्यूज़ चैनलों के साथ काम करने का अनुभव है। वह निम्नलिखित मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं:
- दैनिक भास्कर
- सीधा सवाल
- सच बेधड़क न्यूज़ चैनल
- प्रातः काल (जिसके साथ वह साल 2025 से निरंतर जुड़े हुए हैं)
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी शिक्षा 12वीं पास तक पूरी की है।
