प्रतापगढ़। राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में जाखम नहर के पानी को लेकर उपजा मामूली विवाद एक खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया, जिसमें एक बुजुर्ग को अपनी जान गंवानी पड़ी। इस सनसनीखेज हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी 8 अभियुक्तों को दोषी करार दिया है। माननीय न्यायाधीश आशा कुमारी ने न्याय का डंडा चलाते हुए दशरथ, लक्ष्मण, श्रवण, पदमा, थावरा, कालिया, राजपाल और बिजिया को आजीवन कारावास की कठोर सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 31 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

इस पूरे प्रकरण की नींव 7 नवंबर 2024 को पड़ी थी, जब आड़फला ओका निवासी दामला पुत्र रामा मीणा का जाखम नहर से सिंचाई को लेकर लक्ष्मण, दशरथ और श्रवण के साथ विवाद हुआ था। इसी रंजिश को पालते हुए 9 नवंबर 2024 की शाम करीब 5 से 5:30 बजे के बीच आरोपियों ने एक राय होकर खूनी खेल रचा। लाठी, सरिया और पत्थरों से लैस होकर दशरथ, लक्ष्मण, श्रवण, राजपाल, आर्तिका, कचरी, गीता, थावरा, पदमा, कालिया, जीवली, देवली और बिजिया ने प्रार्थी दामला के घर पर धावा बोल दिया। हमले में थावरा ने लाठी से दामला की कमर और हाथ पर वार किया, जबकि उसके भाई शांति के हाथ-पैर तोड़ दिए गए। परिवार के अन्य सदस्यों विजेंद्र, सजीया और मनीषा को भी पत्थरों व लाठियों से लहूलुहान कर दिया गया।

चीख-पुकार सुनकर जब 70 वर्षीय बुजुर्ग पिता रामा बीच-बचाव करने पहुंचे, तो हमलावरों ने उन पर रहम नहीं दिखाया। दशरथ, लक्ष्मण, श्रवण, थावरा और पदमा सहित अन्य ने लाठियों और सरियों से उन्हें तब तक बेरहमी से पीटा जब तक वे अचेत होकर गिर नहीं गए। परिजनों ने डर के मारे खुद को घर में कैद कर लिया, जिसका फायदा उठाकर आरोपी रामा को मृत समझकर फरार हो गए। मरणासन्न हालत में रामा को पहले पारसोला और फिर उदयपुर के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां 10 नवंबर 2024 की रात 9:30 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया।

पारसोला थाना पुलिस ने 11 नवंबर को प्रार्थी दामला की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर गहन जांच शुरू की। लोक अभियोजक तरुण दास बैरागी ने प्रभावी पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष 15 गवाह और 44 अहम दस्तावेज पेश किए। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त बांस के डंडे और मृतक की खून से सनी धोती बरामद कर एफएसएल जांच के लिए भेजी थी। चश्मदीदों शांतिलाल, विजेंद्र, सजीया, मनीषा और रमिला के बयानों ने दोषियों के खिलाफ कड़ियां जोड़ने का काम किया। लगभग डेढ़ साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने माना कि यह एक क्रूरतम अपराध था। करीब डेढ़ साल पुराने इस मामले में आया यह फैसला न केवल कानून के प्रति जनमानस के विश्वास को अटूट बनाता है, बल्कि अपराधियों को यह कड़ा संदेश भी देता है कि इंसाफ की चौखट पर किसी भी गुनहगार को बख्शा नहीं जाएगा।

Dilip Sen, Pratapgarh

Dilip Sen, Pratapgarh

नाम: दिलीप सेन

वर्तमान पद: रिपोर्टर, जिला मुख्यालय (प्रातः काल)

कार्यक्षेत्र: प्रतापगढ़ जिला (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): क्राइम, राजनीति, और धर्म-कर्म

परिचय 

दिलीप सेन राजस्थान के प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय पर रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह मुख्य रूप से प्रतापगढ़ जिले और जिला मुख्यालय से जुड़े आपराधिक मामलों (क्राइम), स्थानीय राजनीति और धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों (धर्म-कर्म) की खबरों को कवर करते हैं। इन विषयों में उनकी विशेष रुचि और अच्छी पकड़ है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

दिलीप सेन को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में विभिन्न प्रिंट और डिजिटल न्यूज़ चैनलों के साथ काम करने का अनुभव है। वह निम्नलिखित मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं:

  • दैनिक भास्कर
  • सीधा सवाल
  • सच बेधड़क न्यूज़ चैनल
  • प्रातः काल (जिसके साथ वह साल 2025 से निरंतर जुड़े हुए हैं)

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने अपनी शिक्षा 12वीं पास तक पूरी की है।

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