प्रतापगढ़: बंधुआ मजदूरी उन्मूलन पर जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित
विधिक सेवा प्राधिकरण और गायत्री सेवा संस्थान ने रेस्क्यू, पुनर्वास और कानूनी प्रावधानों पर अधिकारियों को दी विस्तृत जानकारी।

प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय स्थित विधिक सेवा प्राधिकरण सभागार में आयोजित कार्यशाला के दौरान उपस्थित प्रशासनिक अधिकारी, पुलिसकर्मी और विषय विशेषज्ञ।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण प्रतापगढ़ एवं गायत्री सेवा संस्थान उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को जिला मुख्यालय स्थित प्राधिकरण सभागार में बंधुआ मजदूरी की रोकथाम, पहचान, रेस्क्यू एवं पुनर्वास विषय पर एक दिवसीय जिला स्तरीय विशेष कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य
कार्यशाला का उद्देश्य जिले में बंधुआ मजदूरी से जुड़े मामलों में प्रशासन, पुलिस, श्रम विभाग, न्यायिक संस्थाओं एवं सामाजिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा रेस्क्यू से लेकर पुनर्वास तक की प्रक्रिया को प्रभावी बनाना रहा।
उपस्थित अधिकारी एवं विभाग
- एडीएम और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक।
- विभिन्न विभागों के अधिकारी।
- पुलिस थानों के बाल कल्याण पुलिस अधिकारी।
- श्रम विभाग और बाल संरक्षण इकाई के प्रतिनिधि।
- अन्य संबंधित अधिकारी।
गायत्री सेवा संस्थान के निदेशक के विचार
गायत्री सेवा संस्थान के निदेशक डॉ. शैलेन्द्र पंड्या ने बताया कि कार्यशाला में बंधुआ मजदूरी के मामलों में विभिन्न स्टेक होल्डर्स की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई।
"समाज में आज भी बंधुआ मजदूरी को लेकर कई मिथ और भ्रांतियां मौजूद हैं, जिसके कारण कई बार आसपास ऐसी घटनाएं होने के बावजूद भी वे सामने नहीं आ पातीं या दर्ज नहीं हो पातीं।"
उन्होंने हाल ही में प्रतापगढ़ में सामने आए कुछ मामलों का उल्लेख करते हुए बताया कि:
- गड़रिया समुदाय के साथ बच्चों को ले जाने के प्रकरण में रेस्क्यू की कार्रवाई की गई थी।
- कुछ समय पूर्व अन्य राज्यों से 50 से अधिक लोगों को मुक्त कराकर वापस लाया गया।
- जिले में बंधुआ मजदूरी के मामले सामने आते हैं, लेकिन कई बार वे पंजीकृत नहीं हो पाते।
डॉ. पंड्या ने आशा व्यक्त की कि इस कार्यशाला के बाद ऐसे मामलों के पंजीकरण में तेजी आएगी और पीड़ितों को जल्द न्याय एवं पुनर्वास मिल सकेगा।
कानूनी प्रावधान एवं विधिक सहायता
सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण प्रतापगढ़ केदारनाथ ने बताया कि कार्यशाला में बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराने के कानूनी प्रावधानों, रेस्क्यू के दौरान आने वाली समस्याओं तथा उपलब्ध विधिक सहायता के संबंध में अधिकारियों को विस्तृत जानकारी दी गई।
"प्रशासन एवं पुलिस को यह बताया गया कि किस प्रकार बंधुआ मजदूरों और बाल श्रमिकों की पहचान कर उन्हें मुक्त कराया जा सकता है तथा मुक्त होने के बाद उन्हें कानूनी सहायता और पुनर्वास योजनाओं से जोड़ा जा सकता है।"
उन्होंने विश्वास जताया कि इस कार्यशाला से पुलिस एवं प्रशासन को बंधुआ मजदूरी और बाल श्रम के मामलों में प्रभावी कार्रवाई करने में सहयोग मिलेगा।
विशेषज्ञों का संबोधन और भविष्य की राह
कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञों ने भी बंधुआ मजदूरी उन्मूलन कानून, पुनर्वास प्रक्रिया तथा व्यावहारिक चुनौतियों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
"जब तक प्रशासन, पुलिस, न्यायिक संस्थाएं और सामाजिक संगठन मिलकर कार्य नहीं करेंगे, तब तक इस कुप्रथा का पूर्ण उन्मूलन संभव नहीं है।"
कार्यशाला को जिले में बंधुआ मजदूरी उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिससे भविष्य में रेस्क्यू, कानूनी कार्रवाई और पुनर्वास की प्रक्रिया अधिक सुदृढ़ होने की उम्मीद है।

Pratahkal Bureau
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