प्रतापगढ़: भारत आदिवासी पार्टी का प्रदर्शन, गृह मंत्री अमित शाह का पुतला फूंका
सांसद राजकुमार रोत पर संसद में की गई टिप्पणी से नाराज बीएपी कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर गृह मंत्री से स्पष्टीकरण की मांग की है।

प्रतापगढ़। राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में आज भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। गांधी चौराहे पर एकत्रित हुए आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने गृह मंत्री के हालिया बयान को आदिवासी अस्मिता पर प्रहार बताते हुए उनका पुतला दहन किया और जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपकर सख्त कार्रवाई की मांग की।
विरोध प्रदर्शन की मुख्य वजह 30 मार्च को संसद में वामपंथी उग्रवाद पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री द्वारा बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत को लेकर की गई टिप्पणी है। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि गृह मंत्री ने सांसद रोत को संबोधित करते हुए कहा था कि "आप चुनाव लड़कर यहां बैठे हैं, नहीं तो आप भी सरेंडर की लिस्ट में होते।" भारत आदिवासी पार्टी ने इस बयान को न केवल एक लोकतांत्रिक जनप्रतिनिधि की गरिमा के खिलाफ बताया, बल्कि इसे संपूर्ण आदिवासी समाज को नक्सलवाद और उग्रवाद से जोड़ने की एक दुर्भावनापूर्ण कोशिश करार दिया।
पार्टी पदाधिकारियों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि सांसद राजकुमार रोत सदन में निरंतर आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों, जल-जंगल-जमीन के मुद्दों, पांचवीं व छठी अनुसूची, पेसा (PESA) कानून और फॉरेस्ट राइट एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन की आवाज उठा रहे हैं। ऐसे में जनहित के मुद्दे उठाने वाले जनप्रतिनिधि के खिलाफ इस तरह की अमर्यादित टिप्पणी करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। भारत आदिवासी पार्टी के जिलाध्यक्ष मुकेश ने मीडिया को संबोधित करते हुए चेतावनी दी कि यह पहली बार नहीं है जब समाज की भावनाओं को आहत किया गया है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि यदि भविष्य में आदिवासी समाज या उनके प्रतिनिधियों के विरुद्ध ऐसी अपमानजनक टिप्पणियां नहीं रुकीं, तो आंदोलन को और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा।
ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से मांग की गई है कि गृह मंत्री अपने बयान पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण दें और विवादित टिप्पणी को संसद की कार्यवाही से तत्काल हटाया जाए। साथ ही, भविष्य में किसी भी समुदाय या जनप्रतिनिधि के प्रति ऐसी टिप्पणियों को रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया गया है। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि आदिवासी समाज संविधान और लोकतंत्र में अटूट विश्वास रखता है, परंतु इस प्रकार के बयान सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने का कार्य करते हैं।

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