प्रतापगढ़। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (आरएसएसबी) द्वारा आयोजित तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती परीक्षा के आगाज के साथ ही प्रतापगढ़ के हजारों युवाओं के भविष्य की परीक्षा भी शुरू हो गई है, लेकिन यह परीक्षा केवल उत्तर पुस्तिकाओं तक सीमित नहीं है। आज, शनिवार 17 जनवरी से शुरू हो रहे इस महाकुंभ में जिले के करीब 30 हजार अभ्यर्थियों को एक ऐसी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, जिसने उनकी तैयारियों के बीच मानसिक और आर्थिक तनाव की लकीरें खींच दी हैं। विडंबना यह है कि प्रतापगढ़ का एक भी युवा अपने गृह जिले में परीक्षा नहीं दे पाएगा, क्योंकि पूरे जिले में प्रशासन द्वारा एक भी परीक्षा केंद्र स्थापित नहीं किया गया है।

राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के तहत यह परीक्षा 20 जनवरी तक चार दिनों तक चलेगी। प्रतिदिन दो पारियों में आयोजित होने वाली इस परीक्षा में पहली पाली सुबह 10 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 3 बजे से शाम 5:30 बजे तक संचालित की जा रही है। 17 जनवरी को लेवल-प्रथम (सामान्य) की परीक्षा के साथ इस सिलसिले की शुरुआत हुई। आगामी दिनों में 18 जनवरी को लेवल-द्वितीय (विज्ञान–गणित एवं सामाजिक अध्ययन), 19 जनवरी को लेवल-द्वितीय (अंग्रेजी एवं हिंदी) तथा अंतिम दिन 20 जनवरी को लेवल-प्रथम एवं लेवल-द्वितीय (संस्कृत) की परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी।

प्रदेशभर में बोर्ड ने केवल 14 चुनिंदा जिलों में परीक्षा केंद्र बनाए हैं, जिसकी सूची से प्रतापगढ़ का नाम पूरी तरह नदारद है। इस निर्णय ने जिले के 30 हजार परीक्षार्थियों को पड़ोसी और दूरस्थ जिलों की ओर पलायन करने पर मजबूर कर दिया है। हाड़ कंपाने वाली ठंड के बीच अभ्यर्थी लंबी यात्राएं करने, होटलों और धर्मशालाओं में शरण लेने और भारी अतिरिक्त खर्च वहन करने को विवश हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ दूसरे जिले में जाकर केंद्र ढूंढना और समय पर पहुँचना अपने आप में एक बड़ी मानसिक जंग है।

स्थानीय अभ्यर्थियों में इस व्यवस्था को लेकर गहरा आक्रोश व्याप्त है। परीक्षार्थियों ने सामूहिक रूप से अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड और सरकार से मांग की है कि भविष्य में आयोजित होने वाली बड़ी भर्ती परीक्षाओं के लिए प्रतापगढ़ में भी परीक्षा केंद्र सुनिश्चित किए जाएं। यह केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की उम्मीदों का सवाल है। जब तक प्रशासन स्थानीय स्तर पर बुनियादी ढांचा और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर परीक्षा केंद्र नहीं बनाता, तब तक प्रतापगढ़ के युवाओं को इसी तरह की 'देशनिकाला' जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा।

Pratahkal Bureau

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