प्रतापगढ़: करोड़ों का नवीन भवन बना 'शोभा की वस्तु', अरनोद सीएचसी में सड़क और स्टाफ के अभाव में सिसकती स्वास्थ्य सेवाएं
प्रतापगढ़ के अरनोद सीएचसी में नवीन भवन के उद्घाटन के बाद भी बदहाली का आलम है। सड़क के अभाव और केवल दो डॉक्टरों के भरोसे चल रहे इस अस्पताल में मरीजों को भारी परेशानी हो रही है। राजस्व मंत्री हेमंत मीणा द्वारा लोकार्पण के बावजूद स्टाफ की कमी और असुरक्षित परिसर ने सरकारी दावों की पोल खोल दी है। जानिए अरनोद स्वास्थ्य केंद्र की जमीनी हकीकत।

प्रतापगढ़। आधुनिक सुख-सुविधाओं और चमचमाते भवनों के दावों के बीच धरातल की हकीकत अक्सर डरावनी होती है। प्रतापगढ़ जिले के अरनोद उपखंड में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) इसका ज्वलंत उदाहरण बन गया है। जहाँ एक ओर सरकार बेहतर चिकित्सा के नाम पर करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं अरनोद का यह प्रमुख चिकित्सा संस्थान आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए खून के आंसू रो रहा है। नवीन भवन के उद्घाटन के हफ्तों बाद भी यहां की स्थिति यह है कि मरीजों को अस्पताल तक पहुँचने के लिए उबड़-खाबड़ रास्तों से होकर 'अग्निपरीक्षा' देनी पड़ रही है।
उल्लेखनीय है कि बीते 14 दिसंबर को राजस्व मंत्री हेमंत मीणा ने बड़े उत्साह के साथ अरनोद सीएचसी के नवीन भवन का शुभारंभ किया था। क्षेत्रवासियों को उम्मीद थी कि नए भवन के साथ उनकी परेशानियां भी दूर हो जाएंगी, लेकिन लोकार्पण के बाद भी व्यवस्थाएं जस की तस बनी हुई हैं। सबसे विकराल समस्या अस्पताल तक पहुँचने के लिए पक्की सड़क का न होना है। अस्पताल परिसर का मार्ग इतना बदहाल है कि एम्बुलेंस का समय पर पहुंचना तो दूर, सामान्य वाहनों का निकलना भी दूभर है। विशेषकर गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह ऊबड़-खाबड़ रास्ता किसी बड़ी दुर्घटना के आमंत्रण से कम नहीं है। बारिश के मौसम में यह मार्ग कीचड़ के दलदल में तब्दील हो जाता है, जिससे मरीजों की जान जोखिम में रहती है।
अव्यवस्थाओं की यह दास्तां यहीं खत्म नहीं होती। अस्पताल परिसर में चारदीवारी (बाउंड्री वॉल) का निर्माण नहीं होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। खुले परिसर में आवारा पशुओं का बेखौफ डेरा रहता है, जो न केवल मरीजों और उनके परिजनों को डराते हैं, बल्कि चिकित्सा स्टाफ के कार्य में भी बाधा डालते हैं। रात्रि के समय सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने से अस्पताल प्रशासन और वहां भर्ती मरीजों के बीच असुरक्षा का माहौल बना रहता है।
चिकित्सा संसाधनों और मानव बल की बात करें तो स्थिति और भी चिंताजनक है। उपखंड स्तर का इतना महत्वपूर्ण केंद्र होने के बावजूद यह अस्पताल वर्तमान में केवल दो डॉक्टरों के भरोसे सांसें ले रहा है। नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी के चलते ओपीडी और आपातकालीन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। एक तरफ मरीजों की लंबी कतारें हैं, तो दूसरी तरफ सीमित स्टाफ के कारण उन्हें समुचित देखभाल नहीं मिल पा रही है। स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि राजस्व मंत्री हेमंत मीणा द्वारा किए गए उद्घाटन के साथ ही सड़क, सुरक्षा दीवार और पर्याप्त स्टाफ की नियुक्ति कर दी जाती, तो यह संस्थान वास्तव में जनता के लिए वरदान साबित होता। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक कुंभकर्णी नींद से जागता है और कब अरनोद की जनता को इन मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिलता है।

Pratahkal Bureau
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