प्रतापगढ़: 25 हजार का इनामी बदमाश लक्ष्मण मोग्या पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार
प्रतापगढ़ पुलिस ने 14 मामलों में वांछित कुख्यात अपराधी को देवाक माता के जंगलों से पकड़ा; गिरफ्तारी के दौरान आरोपी ने खाई में लगाई छलांग।

प्रतापगढ़ जिला पुलिस अधीक्षक बी. आदित्य (केंद्र में बैठे हुए) प्रेस वार्ता के दौरान कुख्यात बदमाश लक्ष्मण मोग्या की गिरफ्तारी और आपराधिक इतिहास की जानकारी देते हुए।
राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में लंबे समय से पुलिस के लिए सिरदर्द बना और आतंक का पर्याय बन चुका कुख्यात इनामी बदमाश लक्ष्मण मोग्या आखिरकार कानून के शिकंजे में आ गया है। जिला पुलिस अधीक्षक बी. आदित्य ने एक प्रेस वार्ता के दौरान इस महत्वपूर्ण कामयाबी का खुलासा किया। दिन के उजाले में घने जंगलों और रात के अंधेरे में दुर्गम पहाड़ियों को अपना ठिकाना बनाकर पुलिस को चकमा देने वाला यह अपराधी देवाक माता के बीहड़ों में छिपा बैठा था। पुलिस की घेराबंदी देख आरोपी ने न केवल प्रतिरोध किया बल्कि जान जोखिम में डालकर भागने का दुस्साहस भी किया, जिसे पुलिस ने अपनी मुस्तैदी से नाकाम कर दिया।
अपराध जगत में लक्ष्मण मोग्या का रसूख केवल छोटीसादड़ी तक ही सीमित नहीं था, बल्कि चित्तौड़गढ़, नीमच और जोधपुर जैसे जिलों में भी उसने अपनी आपराधिक गतिविधियों से खौफ पैदा कर रखा था। वह जिला स्तर के टॉप-10 वांछित अपराधियों की सूची में शामिल था और उस पर 25 हजार रुपए का इनाम घोषित था। लक्ष्मण मोग्या और उसकी गैंग मुख्य रूप से लूटपाट, वाहन छीनने, मारपीट और सार्वजनिक क्षेत्रों में आतंक फैलाने जैसी संगीन वारदातों को अंजाम देने के लिए कुख्यात है। उसके खिलाफ विभिन्न थानों में 14 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं।
इस गिरफ्तारी के दौरान एक चौंकाने वाला पहलू यह सामने आया कि यह गिरोह अपनी वारदातों के वीडियो सोशल मीडिया, विशेषकर इंस्टाग्राम पर जानबूझकर वायरल करता था। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं के बीच अपना वर्चस्व कायम करना और आम जनता के मन में खौफ का माहौल बनाए रखना था। आरोपी अपनी 'गैंगस्टर छवि' को सोशल मीडिया के जरिए प्रमोट कर इलाके में अपना दबदबा सुनिश्चित करना चाहता था।
आरोपी को दबोचने के लिए थाना पुलिस, सर्किल स्पेशल टीम, डीएसटी और साइबर सेल की एक संयुक्त रणनीति तैयार की गई थी। तकनीकी निगरानी के आधार पर जब उसकी लोकेशन धोलापानी थाना क्षेत्र के देवाक माता जंगलों में मिली, तो रविन्द्र पाटीदार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने इलाके की घेराबंदी की। पुलिस को देखते ही लक्ष्मण मोग्या ने पथरीले रास्तों से भागते हुए पुलिस टीम पर हमला कर दिया। उसने एक विशाल पत्थर सीधे रविन्द्र पाटीदार की ओर फेंका, जिससे वे बाल-बाल बच गए। स्थिति को भांपते हुए पुलिस ने पंप एक्शन गन से दो हवाई फायर कर आरोपी को आत्मसमर्पण की चेतावनी दी।
खुद को घिरता देख लक्ष्मण मोग्या ने करीब 15 फीट गहरी खाई में छलांग लगा दी, जिसके कारण उसके पैरों में गंभीर चोटें आईं। पुलिस कर्मियों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए खाई में उतरकर घायल आरोपी को बाहर निकाला। उसे तत्काल उपचार के लिए जिला चिकित्सालय प्रतापगढ़ ले जाया गया, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया।
इस पूरे प्रकरण में 9 मई की एक घटना ने इलाके में भारी आक्रोश पैदा कर दिया था। बरवाड़ा नाका निवासी राधेश्याम रेगर ने शिकायत दर्ज कराई थी कि लक्ष्मण मोग्या अपने सहयोगियों कन्हैयालाल, कवरलाल, धनराज और ताराचंद के साथ उसकी किराणा, टायर पंचर और वेल्डिंग की दुकान पर आया था। आरोपियों ने जबरन उधार सामान मांगा और मना करने पर दुकान के बाहर खड़ी ओमनी कार में तोड़फोड़ कर डाली। इतना ही नहीं, बदमाशों ने दुकान में पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी और वारदात का वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इस गिरफ्तारी से पुलिस ने न केवल एक वांछित अपराधी को सलाखों के पीछे भेजा है, बल्कि इलाके में कानून व्यवस्था के प्रति जनता का विश्वास भी बहाल किया है।

Pratahkal Bureau
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