गिरनार तीर्थ यात्रा: नमन वया के नेतृत्व में 520 श्रद्धालुओं ने की धर्म आराधना
धर्म और संस्कारों की अलख जगाते हुए नमन भाई वया ने अपनी 137वीं गिरनार तीर्थ यात्रा पूर्ण की। 520 से अधिक श्रद्धालुओं के साथ संपन्न हुई इस आध्यात्मिक यात्रा ने युवाओं को नई दिशा और व्यसनमुक्त जीवन जीने की सीख दी है। जानें इस यात्रा का अनुभव।

छोटी सादड़ी के नमन वया के मार्गदर्शन में गिरनार तीर्थ की यात्रा संपन्न करते हुए श्रद्धालु। इस चार दिवसीय यात्रा में राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत से 520 से अधिक लोग शामिल हुए।
छोटी सादड़ी। सनातन संस्कृति के संवर्धन और युवाओं को अध्यात्म की मुख्यधारा से जोड़ने के अपने संकल्प को निरंतर गति देते हुए, नगर के प्रबुद्ध समाजसेवी विमल वया के सुपुत्र एवं युवाओं के प्रेरणास्रोत नमन भाई वया ने अपनी 137वीं गिरनार तीर्थ यात्रा को सफलतापूर्वक संपन्न किया। तीर्थराज गिरनार की यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र रही, बल्कि इसने सैकड़ों श्रद्धालुओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की नई ज्योति भी प्रज्वलित की है।
नमन भाई वया के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित इस आध्यात्मिक यात्रा में राजस्थान और मालवा क्षेत्र के दो सौ से अधिक श्रद्धालुओं सहित कुल 520 से अधिक आस्थावानों ने भाग लिया। यह गौरवमयी यात्रा गिरनार तीर्थ उत्कर्ष प्रेरक आचार्य भगवंत श्री हेमवल्लभसूरीश्वरजी महाराज साहब के मंगल आशीर्वाद एवं गिरनार भक्ति युवा समिति, वडोदरा के कुशल संचालन में संपन्न हुई। चार दिनों तक चली इस यात्रा में राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र एवं दक्षिण भारत समेत देशभर से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
जूनागढ़ (गुजरात) स्थित तीर्थराज गिरनार, भगवान श्री नेमिनाथ प्रभु की पावन तपोभूमि के रूप में सर्व समाज की आस्था का प्रमुख केंद्र है। हज़ारों सीढ़ियों की कठिन चढ़ाई को पार करते हुए श्रद्धालु जब प्रभु चरणों में नतमस्तक होते हैं, तो वह दृश्य अत्यंत भक्तिमय हो जाता है। इस यात्रा के दौरान अनेक श्रद्धालुओं ने उपवास, आयंबिल एवं एकाशना जैसी कठिन तपस्याओं के माध्यम से धर्म आराधना का विशेष लाभ प्राप्त किया। नमन भाई के सानिध्य में यात्रा के दौरान यात्रियों को व्यसनमुक्त जीवन जीने, नित्य देव-दर्शन एवं पूजा करने, माता-पिता का सम्मान करने और सदाचारपूर्ण जीवन जीने का संदेश दिया गया, जो उनके जीवन की दिशा बदलने में सहायक सिद्ध होगा।
इस अत्यंत चुनौतीपूर्ण एवं गौरवशाली यात्रा को सफल बनाने में वडोदरा के मिहिर शाह एवं मेहुल शाह, महाराष्ट्र की आशाबेन, रतलाम के राहुल मुणेत, रौनक मेहता, कुणाल चत्तर, इंदौर के अंकित शाह, अक्षत जैन तथा छोटी सादड़ी के संजय मारू का विशेष सहयोग रहा। यात्रा के समापन पर नमन भाई वया ने सभी यात्रियों, व्यवस्थापकों एवं सहयोगियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। यह यात्रा न केवल एक भौगोलिक गंतव्य की पूर्णता थी, बल्कि युवाओं में धर्म और संस्कारों के प्रति चेतना जगाने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी है।

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