धरियावद में 20 साल बाद रावण दहन, 45 मिनट आतिशबाजी
नगर पालिका के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय उत्सव में 81 फीट ऊंचे रावण समेत सात पुतलों का दहन किया गया।

धरियावद में 20 साल बाद विजय दशमी पर रावण दहन और आतिशबाजी का आयोजन।
धरियावद में 20 साल बाद विजय दशमी पर रावण दहन का आयोजन हुआ, जिसमें 81 फीट ऊंचे रावण के पुतले के दहन और करीब 45 मिनट तक चली भव्य आतिशबाजी ने नगरवासियों का मन मोह लिया। इस ऐतिहासिक आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उदयपुर रोड स्थित विद्या निकेतन प्रांगण पहुंचे। पूरा परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।
नगर पालिका के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय विजय दशमी उत्सव का समापन मंगलवार, 20 अक्टूबर को उदयपुर रोड स्थित विद्या निकेतन प्रांगण में भव्य रावण दहन के साथ हुआ। उत्सव के अंतिम दिन 81 फीट ऊंचे रावण के पुतले को देखने के लिए शहरवासियों की भारी भीड़ उमड़ी। मैदान में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के साथ अतिकाय सहित सात अन्य राक्षस रूपी पुतलों का भी दहन किया गया। मुख्य रावण का पुतला 81 फीट ऊंचा था, जबकि मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतले 51-51 फीट ऊंचे बनाए गए थे।
पुतला दहन से ठीक पहले करीब 45 मिनट तक शानदार आतिशबाजी की गई। आसमान रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा उठा और आतिशबाजी का नजारा देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। रावण दहन के इस आयोजन में नगरवासियों की बड़ी भागीदारी रही।
रावण दहन से पहले भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता के स्वरूप में सजे नन्हे-मुन्ने बालकों ने पारंपरिक रूप से पूजा-अर्चना की। इसके बाद इन्हीं बालकों ने अपने हाथों से विशाल रावण के पुतले में आग लगाई। पुतले के जलते ही पूरा प्रांगण जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।
आयोजन के दौरान नगर पालिका अध्यक्ष रेखा चौधरी, उपाध्यक्ष भुवन प्रताप सिंह राणावत, अधिशाषी अधिकारी (ईओ) सुरेंद्र कुमार मीणा और नगर पालिका के पार्षद मौजूद रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में स्थानीय प्रशासन और पुलिस व्यवस्था का भी पूरा सहयोग रहा। सुरक्षा और व्यवस्थाओं के बीच हजारों की संख्या में पहुंचे नगरवासियों ने शांतिपूर्ण ढंग से विजय दशमी उत्सव का आनंद लिया। धरियावद में दो दशक बाद हुए रावण दहन ने तीन दिवसीय विजय दशमी उत्सव के समापन को विशेष बना दिया।

