धरियावद कोर्ट का बड़ा फैसला: ग्राम पंचायत द्वारा जारी अवैध पट्टा निरस्त
कोर्ट ने पैतृक संपत्ति पर बिना अन्य वारिसों की सहमति के जारी पट्टे को शून्य घोषित किया और विवादित भूखंड पर निर्माण व हस्तांतरण पर स्थायी रोक लगा दी।

तत्कालीन ग्राम पंचायत धरियावद (वर्तमान नगर पालिका) द्वारा बिना परिवारजनों की स्वीकृति के अवैध पट्टा जारी करने के मामले में धरियावद कोर्ट ने पूर्व धरियावद ग्राम पंचायत द्वारा जारी पट्टे को अवैध घोषित कर पट्टा खरीज करने के आदेश दिए। स्थानीय अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में ग्राम पंचायत धरियावद द्वारा पैतृक संपत्ति पर बिना अन्य वारिसों की सहमति के जारी किए गए पट्टे को अवैध मानते हुए शून्य (निरस्त) घोषित कर दिया है। इसके साथ ही न्यायालय ने विवादित संपत्ति पर किसी भी प्रकार की तोड़फोड़, नया निर्माण करने या उसे गिरवी रखने पर स्थायी रोक (स्थायी निषेधाज्ञा) लगा दी है।
न्यायिक आदेश और प्रकरण की पृष्ठभूमि
यह आदेश धरियावद के वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सरफराज नवाज ने सुनाया है। यह था पूरा मामला दरअसल पूरा मामला धरियावद कस्बे के उदयपुर रोड स्थित एक बेशकीमती भूखंड से जुड़ा है। वादी धरियावद निवासी जितेन्द्र कुमार झूठावत और उनकी मां हुलासदेवी ने कोर्ट में वाद दायर कर बताया था कि यह संपत्ति उनके दिवंगत पिता कनकमल झूठावत की स्व-अर्जित व पैतृक संपत्ति थी। कनकमल की मृत्यु के बाद उनके सभी कानूनी वारिसों (पत्नी, तीन पुत्र और दो पुत्रियों) का इस पर बराबर का हक था।
नियमों की अनदेखी और मिलीभगत का आरोप
लेकिन प्रतिवादी संख्या-1 पवन कुमार झूठावत (पुत्र स्व. कनकमल) ने अन्य भाई-बहनों व मां की सहमति के बिना, नियमों की अनदेखी करते हुए ग्राम पंचायत धरियावद से मिलीभगत कर दिनांक 05.09.2019 को अपने नाम से पट्टा संख्या 110 जारी करवा लिया। बाद में 06.01.2021 को इसका नवीनीकरण करवाकर 15.01.2021 को उपपंजीयक कार्यालय में स्थित इसका पंजीयन भी करवा लिया। न्यायालय ने माना कि बिना सबकी लिखित सहमति के अकेले एक वारिस के नाम पट्टा जारी करना पूरी तरह गैर-कानूनी है।
आपसी सहमति का झूठा दावा पड़ा भारी
कोर्ट में पवन कुमार की ओर से दलील दी गई थी कि "करीब 40-45 साल पहले हुए एक मौखिक पारिवारिक बंटवारे में यह हिस्सा उनके भाग में आया था और वे 50 सालों से इस पर काबिज हैं।" हालांकि, सुनवाई के दौरान जब पवन कुमार से कोर्ट में जिरह की गई, तो पवन कुमार यह साबित करने में असफल रहे। कोर्ट ने माना कि संपत्ति मूल रूप से पिता कनकमल की थी और उनकी मृत्यु के बाद सभी 6 वारिसों का इस पर समान अधिकार बनता है।
न्यायालय का कड़ा रुख और प्रभावी आदेश
दोनों पक्षों की लंबी बहस और साक्ष्यों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद न्यायाधीश सरफराज नवाज ने अपने फैसले में कहा: "पट्टा हुआ शून्य: ग्राम पंचायत धरियावद द्वारा पवन कुमार के पक्ष में जारी पट्टा संख्या 110 (दिनांक 05.09.2019) और उसका नवीनीकरण शून्य घोषित किया जाता है।" न्यायालय ने विवादित संपत्ति पर किसी भी प्रकार की तोड़फोड़, नया निर्माण करने या उसे गिरवी रखने पर स्थायी रोक (स्थायी निषेधाज्ञा) लगा दी है।
राजस्व रिकॉर्ड में इंद्राज के निर्देश
अभिलेखों में दर्ज करने के आदेश के तहत कोर्ट ने वर्तमान नगरपालिका/ग्राम पंचायत धरियावद और उपपंजीयक (तहसीलदार) धरियावद को आदेश दिया है कि वे अपने सरकारी रिकॉर्ड और राजस्व रिकॉर्ड में इस पट्टे को निरस्त करने का इंद्राज (एंट्री) करें। निर्माण व हस्तांतरण पर रोक लगाते हुए प्रतिवादी पवन कुमार को आदेश दिया गया है कि वे इस भूखंड पर न तो कोई तोड़फोड़ या नया निर्माण करेंगे और न ही इसे किसी को बेचेंगे या गिरवी रखेंगे।

Pratahkal Bureau
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