धरियावद में करवा चौथ पर चांद का इंतजार, रात 8 बजे तक बादलों ने रोकी चंद्रदर्शन की राह
धरियावद में 29 अक्टूबर को करवा चौथ का पर्व धार्मिक आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने निर्जल व्रत रखकर करवा माता की पूजा की, लेकिन रात 8 बजे तक बादल छाए रहने से चंद्रदर्शन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।

धरियावद में महिलाओं ने पारंपरिक रूप से करवा चौथ का पर्व मनाया।
धरियावद में करवा चौथ का पर्व धार्मिक आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया। दिनभर निर्जल उपवास रखने के बाद सुहागिन महिलाओं ने शाम को सोलह शृंगार कर करवा माता की पूजा-अर्चना की। हालांकि, देर शाम तक आसमान में बादल छाए रहने के कारण रात 8 बजे तक चंद्रदर्शन नहीं हो सके, जिससे महिलाओं को चांद निकलने का बेसब्री से इंतजार करना पड़ा।
धरियावद, 29 अक्टूबर। धरियावद नगर सहित आसपास के अंचल में गुरुवार को करवा चौथ का पर्व पूर्ण धार्मिक आस्था के साथ मनाया गया। सुबह से ही सुहागिन महिलाओं में पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। खासकर नवविवाहिताओं में अपना पहला करवा चौथ मनाने को लेकर उमंग दिखाई दी।
दिनभर निर्जल उपवास रखने के बाद शाम को महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार सोलह शृंगार किया और करवा माता की पूजा-अर्चना की। शाम ढलने के साथ ही पारंपरिक आकर्षक परिधानों और भव्य आभूषणों से सजी महिलाएं हाथों में चलनी लेकर चंद्रोदय की प्रतीक्षा करने लगीं।
इस बीच मौसम ने महिलाओं का इंतजार लंबा कर दिया। आसमान में बादल छाए रहने और बादलों की लुकाछिपी के कारण रात 8 बजे तक चांद के दर्शन नहीं हो सके। सुहागिन महिलाएं छतों और गलियों में सज-धजकर चांद निकलने की राह देखती रहीं। लंबे इंतजार के बावजूद महिलाओं के चेहरे पर पर्व का उत्साह बना रहा।
करवा चौथ के अवसर पर धरियावद में महिलाओं के बीच पारंपरिक उत्सव का माहौल देखने को मिला। चंद्रदर्शन की प्रतीक्षा के दौरान संगीत और नृत्य का दौर भी चला। इस तरह बादलों के कारण चांद के दीदार में देरी होने के बावजूद नगर और आसपास के क्षेत्र में करवा चौथ की धार्मिक परंपराओं और उत्साह का माहौल बना रहा।

