छोटीसादड़ी। हाड़ कंपा देने वाली ठंड और ठिठुरती रातों के बीच जब संपन्न वर्ग घरों में दुबका है, तब छोटीसादड़ी के रॉयल ग्रुप सेवा संस्थान के सदस्यों ने दुर्गम पहाड़ियों और पथरीले रास्तों की परवाह किए बिना मानवता की एक नई इबारत लिखी है। पिछले 14 वर्षों से सेवा की मशाल जलाए हुए इस संस्थान ने अपने वस्त्रदान अभियान के प्रथम चरण में क्षेत्र के 7 दूरदराज विद्यालयों के 540 निर्धन बच्चों को ऊनी स्वेटर, टोपे और मोज़े वितरित कर उनके चेहरों पर मुस्कान बिखेरी है।

इस पुनीत कार्य की शुरुआत रॉयल ग्रुप के सदस्यों द्वारा आदिवासी अंचलों के उन कठिन क्षेत्रों से की गई, जहाँ मूलभूत सुविधाएँ भी मुश्किल से पहुँच पाती हैं। अभियान के तहत टांडा घाटा, नरेला फला, गादी साकड़ा, तालाब विद्यालय, रेटा, गड़वेला और बिल्ली खेड़ा जैसे ग्रामीण विद्यालयों के बच्चों को जब नए गर्म कपड़े मिले, तो उनकी मासूम आँखों की चमक ने उपस्थित जनों को भावुक कर दिया। भीषण ठंड के कारण जो बच्चे विद्यालय आने में संकोच कर रहे थे, अब वे सुरक्षित और उत्साहित नज़र आए।

संस्थान के प्रतिनिधि लोकेश जायसवाल ने इस अभियान की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह सेवा यात्रा नगरवासियों के अटूट विश्वास और जनसहयोग का परिणाम है जो निरंतर 14 वर्षों से निर्बाध रूप से जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह इस वर्ष का केवल प्रथम चरण है और संस्था का संकल्प है कि इस कड़ाके की ठंड में क्षेत्र का कोई भी निर्धन बच्चा या बुजुर्ग असहाय न रहे। आने वाले दिनों में इस अभियान का विस्तार कर अधिक से अधिक जरूरतमंदों तक राहत पहुँचाई जाएगी।

इस व्यापक वस्त्र वितरण अभियान की सफलता में टीम वर्क की एक अनुकरणीय मिसाल देखने को मिली। मानवता के इस महाकुंभ में लोकेश जायसवाल के साथ दीपक राव मराठा, बनवारी लाल जोशी, गोपाल लाल टांक, दिलीप द्रोणाचार्य शर्मा, राजकुमार गायरी, शाहिद खान पठान, सिद्धार्थ नलवाया, हरिओम सोलंकी, देवी लाल उपाध्याय, मनीष शर्मा, कमल टेलर, जनार्दन जायसवाल, कैलाश चंद शर्मा, सुशील अग्रवाल, आयुष जोशी, हिमांशु जायसवाल, अनंत शर्मा, जुबेर खान, आयुष सोलंकी, गोपाल गायरी, वीरा जायसवाल एवं अशफाक खान ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए अपना सराहनीय योगदान दिया।

रॉयल ग्रुप का यह समर्पण केवल कपड़ों का वितरण मात्र नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रति संवेदनशीलता और सामूहिकता का वह सशक्त संदेश है, जो बताता है कि यदि इच्छाशक्ति हो तो प्रतिकूल परिस्थितियों में भी बदलाव लाया जा सकता है। क्षेत्र में इस पहल की चहुंओर प्रशंसा हो रही है और इसे सामाजिक सरोकार का एक उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है।

Pratahkal Bureau

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