छोटीसादड़ी: बसेड़ा ग्राम सेवा सहकारी समिति के 8 सदस्यों के इस्तीफे से अध्यक्ष आंजना की मुश्किलें बढ़ीं
छोटीसादड़ी में बसेड़ा ग्राम सेवा सहकारी समिति के 11 सदस्यीय बोर्ड में से 8 सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया, जिससे अध्यक्ष घनश्याम आंजना की मुश्किलें बढ़ीं। किसानों के ऋण और खाद वितरण में समस्याओं का हवाला देते हुए इस्तीफों के बाद बोर्ड अल्पमत में आ गया है, प्रशासनिक हस्तक्षेप की संभावना बढ़ गई।

छोटीसादड़ी। बसेड़ा ग्राम सेवा सहकारी समिति में सोमवार को राजनीतिक और प्रशासनिक क्षेत्र में बड़ा घटनाक्रम सामने आया। समिति के संचालक मंडल के 11 सदस्यों में से 8 ने प्रतापगढ़ स्थित जिला प्रशासन कार्यालय पहुंचकर अपने इस्तीफे सौंप दिए, जिससे समिति का बोर्ड अल्पमत में आ गया और अध्यक्ष घनश्याम आंजना की मुश्किलें बढ़ गईं। अब यदि अध्यक्ष बहुमत साबित नहीं कर पाते हैं तो समिति का बोर्ड भंग होकर प्रशासक नियुक्त किया जा सकता है।
इस्तीफा देने वाले सदस्यों में कमल सिंह आंजना, पुष्कर लाल पाटीदार, संजीत कुमार हरिजन, पिंकी पाटीदार और राधाकृष्ण मीणा शामिल हैं। इन सदस्यों ने आरोप लगाया कि पिछले करीब दो वर्षों से समिति में मनमानी हो रही थी और किसानों को ऋण लेने व जमा कराने में कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि कई किसानों को ऋण देने से मना किया गया और रबी फसल के लिए खाद समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई। किसानों की समस्याओं को लेकर विभाग में कई शिकायतें भी की गई थीं। बोर्ड भंग कर प्रशासक नियुक्त कराने के उद्देश्य से ही इस्तीफे दिए गए हैं।
इसी तरह, कांग्रेस समर्थित समिति के तीन सदस्य उपाध्यक्ष शांतिलाल आंजना, जीवन लाल आंजना और भरत कुमार आंजना ने भी किसानों के हित का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनका कहना था कि किसानों के ऋण पर ब्याज बढ़ाने से रोका जाए, ऋण समय पर जमा होकर दोबारा किसानों तक पहुंच सके और खाद-उर्वरक की आपूर्ति समय पर हो।
वहीं, अध्यक्ष घनश्याम आंजना ने इस्तीफों को राजनीतिक दबाव का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि 15 अक्टूबर 2022 को समिति का कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने गोदाम निर्माण के लिए 12 लाख, ट्रैक्टर के लिए 10 लाख और रिपेयरिंग व लेट-बाथ निर्माण के लिए 3 लाख रुपए की स्वीकृति करवाई और सभी कार्य पूरे कराए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रतापूरा, गजपुरा और चांदोली गांवों के अलग होने के बावजूद किसानों को लगभग दो करोड़ रुपए से अधिक का ऋण वितरित किया गया, जिससे बसेड़ा क्षेत्र की यह सबसे बड़ी ऋण वितरण करने वाली सरकारी समिति बनी।
अध्यक्ष आंजना ने आरोप लगाया कि सरकार बदलने के बाद विभागीय दबाव में समिति को पहले भी भंग करने के प्रयास हुए, जिन पर जोधपुर हाईकोर्ट से स्टे लेकर समिति का संचालन किया जा रहा था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसानों को समय पर खाद, बीज, दवाइयां और ट्रैक्टर ऋण की सुविधा दी जा रही थी, लेकिन राजनीतिक कारणों से यह सब सहन नहीं हो पा रहा।
इस घटना ने बसेड़ा ग्राम सेवा सहकारी समिति के संचालन और किसानों के हित को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। समिति की स्थिति अब अनिश्चित है और आगे की प्रक्रिया में प्रशासक की नियुक्ति संभावित है, जिससे क्षेत्र के किसानों और समिति के भविष्य पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।

Pratahkal Bureau
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