डेढ़ साल पहले डिमांड राशि जमा, अब तक कृषि कनेक्शन नहीं; रबी बुवाई में किसान परेशान
छोटीसादड़ी में कई किसानों ने जून-जुलाई 2025 में कृषि कनेक्शन की डिमांड राशि जमा कराई, लेकिन अब तक कनेक्शन नहीं मिला। रबी बुवाई के बीच किसान विद्युत विभाग के चक्कर काट रहे हैं और लंबित कनेक्शनों पर सवाल उठा रहे हैं।

छोटीसादड़ी। रबी की फसल की बुवाई का समय शुरू होते ही छोटीसादड़ी क्षेत्र के किसानों की बिजली कनेक्शन को लेकर परेशानी फिर सामने आ गई है। खेत तैयार हैं और किसान बुवाई की तैयारी में जुटे हैं, लेकिन सिंचाई के लिए बिजली कनेक्शन नहीं मिलने से कई किसानों को विद्युत विभाग के कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। किसानों का आरोप है कि कृषि कनेक्शन के लिए करीब डेढ़ वर्ष पहले नियमानुसार फाइल लगाकर विभाग की ओर से मांगी गई डिमांड राशि जमा करा दी गई थी, इसके बावजूद अब तक कनेक्शन नहीं मिला है।
किसानों के अनुसार जून-जुलाई 2025 में कृषि कनेक्शन के लिए आवेदन किया गया था। विभाग की ओर से मांगी गई डिमांड राशि भी जमा करवा दी गई। किसानों को उम्मीद थी कि निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद खेत तक बिजली पहुंच जाएगी और आगामी फसल की सिंचाई की चिंता दूर होगी। लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कनेक्शन नहीं मिलने से उनकी परेशानी बढ़ गई है। रबी की फसल का समय आने पर किसान अब अधिकारियों और कर्मचारियों से कनेक्शन जारी करने की गुहार लगा रहे हैं।
किसानों का कहना है कि जब विभाग आवेदन के साथ डिमांड राशि जमा करवा लेता है तो कनेक्शन जारी करने में इतनी लंबी देरी क्यों हो रही है। फसल के सीजन में किसान बिजली कनेक्शन की स्थिति जानने के लिए विभागीय कार्यालय पहुंचते हैं, लेकिन कभी प्रक्रिया तो कभी अन्य कारणों का हवाला देकर उन्हें वापस लौटना पड़ता है। किसानों की सबसे बड़ी चिंता रबी की बुवाई का समय निकलना है। समय पर सिंचाई की सुविधा नहीं मिलने पर फसल उत्पादन पर सीधा नुकसान होने की आशंका है। कम बारिश के चलते पहले ही किसान प्राकृतिक परिस्थितियों से परेशान हैं। ऐसे में बिजली कनेक्शन में देरी उनकी मुश्किल और बढ़ा रही है।
छोटीसादड़ी दो जिलों के बीच स्थित क्षेत्र है और लंबे समय से विभिन्न विकास संबंधी समस्याओं को लेकर चर्चा में रहा है। राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र ने पूर्व में सरकार में मंत्री रहे जनप्रतिनिधि भी दिए हैं। वर्तमान में भी क्षेत्र के आसपास सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालने वाले जनप्रतिनिधि मौजूद हैं। इसके बावजूद किसानों का कहना है कि स्थानीय स्तर की मूलभूत समस्याओं के समाधान के लिए उन्हें बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
किसानों का कहना है कि चुनाव के दौरान खेत, किसान, सिंचाई और बिजली जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए जाते हैं, लेकिन चुनाव के बाद इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए किसानों को विभागीय कार्यालयों के दरवाजे खटखटाने पड़ते हैं।
किसानों ने विद्युत विभाग के स्थानीय अधिकारियों से सवाल किया है कि जब किसान ने समय पर आवेदन कर दिया और विभाग की डिमांड राशि भी जमा कर दी तो डेढ़ वर्ष बाद भी कृषि कनेक्शन क्यों लंबित है। किसानों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या विभाग के पास लंबित कृषि कनेक्शनों के लिए कोई समयबद्ध कार्ययोजना है। यदि किसी तकनीकी या विभागीय कारण से कनेक्शन अटका हुआ है तो किसान को इसकी स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी जा रही है।
किसानों ने मांग की है कि विद्युत विभाग लंबित कृषि कनेक्शनों की सूची सार्वजनिक करे, प्रत्येक कनेक्शन की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करे और पात्र किसानों को प्राथमिकता के आधार पर कनेक्शन उपलब्ध करवाए। रबी की बुवाई के समय किसानों के लिए बिजली कनेक्शन का इंतजार सीधे सिंचाई और फसल उत्पादन से जुड़ा है। अब किसानों की नजर इस बात पर है कि लंबित कनेक्शन विभागीय प्रक्रिया में ही अटके रहते हैं या खेतों तक बिजली पहुंचती है।

Shelendra Singh Yadav(Pratapgarh)
नाम: शैलेन्द्र सिंह यादव (Shelendra Singh Yadav)
वर्तमान पद: संवाददाता (प्रातःकाल)
कार्यक्षेत्र: छोटीसादड़ी, जिला प्रतापगढ़ (राजस्थान)
अनुभव: 10 वर्षों से अधिक
परिचय
शैलेन्द्र सिंह यादव राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले छोटीसादड़ी क्षेत्र के संवाददाता हैं। वह मुख्य रूप से स्थानीय स्तर पर सामाजिक, धार्मिक एवं जमीनी हकीकत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां और समाचार एकत्रित कर उन्हें प्रकाशित करने का कार्य करते हैं।
बीट और कवरेज (Beats & Coverage)
वह अपने कार्यक्षेत्र से निम्नलिखित सभी प्रमुख विषयों पर नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं:
- राजनीति: स्थानीय राजनीतिक घटनाक्रम, चुनाव और जनप्रतिनिधियों से जुड़े समाचार।
- क्राइम: पुलिस कार्रवाई, कानून-व्यवस्था और अपराध से संबंधित मामले।
- प्रशासन: सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली, प्रशासनिक निर्णय और विकास कार्य।
- शिक्षा एवं स्वास्थ्य: क्षेत्र की शैक्षणिक व्यवस्था, चिकित्सा सेवाएं और सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं।
- बिज़नेस: स्थानीय बाजार, व्यापारिक गतिविधियां और आर्थिक मुद्दे।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी शिक्षा में स्नातक (Graduate) की डिग्री हासिल की
