छोटीसादड़ी नगर में धार्मिक आस्था और जनसुविधाओं से जुड़े दो अहम मुद्दों को लेकर सोमवार से गांधी चौराहा पर शांतिपूर्ण अनिश्चितकालीन धरने की शुरुआत हो गई। नीमच मार्ग स्थित अन्नपूर्णा माता मंदिर की कृषि भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने तथा मोक्षधाम मार्ग पर क्षतिग्रस्त विश्राम घाट के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर यह आंदोलन सामाजिक कार्यकर्ता माणक वैष्णव के नेतृत्व में प्रारंभ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में नगरवासियों ने सहभागिता निभाई।

धरने की शुरुआत से पूर्व सोमवार सुबह करीब 10 बजे सभी सहभागी अन्नपूर्णा माता मंदिर पहुंचे, जहां विधिवत आशीर्वाद लेने के बाद नगर पालिका कार्यालय के बाहर गांधी चौराहा पर धरने पर बैठ गए। धरना स्थल पर दिनभर नगरवासियों का आना-जाना लगा रहा और लोगों ने आंदोलन के प्रति अपना समर्थन प्रकट किया।

धरने को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता माणक वैष्णव ने कहा कि अन्नपूर्णा माता मंदिर की कृषि भूमि पर हो रहा अतिक्रमण न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा रहा है, बल्कि मंदिर से जुड़ी परंपराओं और अधिकारों पर भी आघात है। वहीं मोक्षधाम मार्ग पर स्थित विश्राम घाट लंबे समय से क्षतिग्रस्त अवस्था में है, जिसके कारण अंतिम यात्रा में शामिल होने वाले लोगों को गंभीर असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि इन दोनों मुद्दों को लेकर प्रशासन को कई बार लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से नागरिकों में गहरा आक्रोश है।

माणक वैष्णव ने नगरवासियों से अपील की कि वे जनहित से जुड़े इन मुद्दों के समाधान के लिए धरने में अधिक से अधिक संख्या में शामिल हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन पूरी तरह गांधीवादी और शांतिपूर्ण तरीके से किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य प्रशासन का ध्यान समस्याओं की गंभीरता की ओर आकृष्ट करना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों का शीघ्र निराकरण नहीं किया गया तो धरना अनिश्चितकालीन जारी रहेगा और आगे चलकर भूख हड़ताल तथा आमरण अनशन जैसे कदम उठाए जाएंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

धरने के दौरान पूर्व सरपंच शिवलाल गुर्जर, कैलाश तिवारी, सत्यनारायण शर्मा, शंकरलाल मीणा, मुकेश शर्मा, शेखर सोनी, पारस चौहान, कन्हैयालाल गुर्जर, ओमप्रकाश प्रजापत, बाबूलाल तेली और दयाराम गायरी सहित नगर के अनेक गणमान्य नागरिकों एवं आमजन ने आंदोलन को समर्थन दिया। यह धरना न केवल धार्मिक संपत्ति की सुरक्षा, बल्कि नगर की मूलभूत सुविधाओं के संरक्षण की मांग को लेकर एक सशक्त जनआंदोलन के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है।

Pratahkal Bureau

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