छोटीसादड़ी। प्रतापगढ़ जिले के आदिवासी अंचलों से रोज़गार की तलाश में निकले 53 आदिवासी मजदूरों के लिए महाराष्ट्र की धरती उम्मीद नहीं, बल्कि शोषण और बंधन का प्रतीक बन गई। बेहतर मजदूरी, मुफ्त खाना और रहने की सुविधा का लालच देकर ले जाए गए इन मजदूरों को महाराष्ट्र के शोलापुर जिले में गन्ने के खेतों में बंधक बनाकर अमानवीय परिस्थितियों में काम करने को मजबूर किया गया। आधी रात को हुई प्रेस वार्ता में पुलिस अधीक्षक बी. आदित्य ने पूरे मामले का सनसनीखेज खुलासा किया।

पुलिस अधीक्षक बी. आदित्य ने बताया कि 22 दिसंबर को जिला पुलिस अधीक्षक प्रतापगढ़ को सूचना मिली कि घण्टाली, पीपलखूँट और पारसोला थाना क्षेत्रों के ग्राम वरदा, जामली, मालिया, गोठड़ा, उमरिया पाड़ा, बड़ा काली घाटी, ठेसला, कुमारी सहित अन्य गांवों के महिला-पुरुष मजदूरों को दो माह पूर्व मजदूरी के नाम पर महाराष्ट्र ले जाया गया था। प्रारंभ में इन मजदूरों को इंदौर, मध्यप्रदेश में प्रति व्यक्ति 500 रुपये मजदूरी, मुफ्त भोजन और आवास का झांसा दिया गया, लेकिन योजना के तहत करीब 100 लोगों को महाराष्ट्र के शोलापुर जिले के अकलूज थाना क्षेत्र के जाबुड़ गांव पहुंचा दिया गया।

यह पूरा षड्यंत्र महाराष्ट्र निवासी दलाल सीताराम पाटिल, अलवर (राजस्थान) के खान नामक व्यक्ति और एक स्थानीय सहयोगी द्वारा रचा गया। तीनों ने मजदूरों को अलग-अलग जमींदारों के पास गन्ने के खेतों में काम पर लगा दिया। इस दौरान दलाल खान ने जमींदारों से मजदूरों की मजदूरी के रूप में 9 लाख 50 हजार रुपये एडवांस लेकर अलवर लौट गया, जबकि सीताराम पाटिल ने 18 लाख रुपये अग्रिम राशि वसूल ली।

जब मजदूरों ने अपनी मजदूरी मांगी या काम से इंकार किया तो उनके साथ मारपीट, मानसिक उत्पीड़न और महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। गन्ने के फार्म हाउसों और बाड़ों में उन्हें जबरन बंद कर बंधक बनाकर काम करवाया गया। किसी भी मजदूर को अब तक एक भी रुपया मजदूरी के रूप में नहीं दिया गया। किसी तरह मौका पाकर कुछ मजदूर वहां से भागने में सफल हुए और अपने परिजनों को फोन कर आपबीती सुनाई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक बी. आदित्य के निर्देश पर घण्टाली थाना उप निरीक्षक सोहन लाल को टीम सहित मजदूरों के परिजनों के साथ तुरंत महाराष्ट्र रवाना किया गया। उप निरीक्षक सोहन लाल और उनकी टीम ने अत्यंत कठिन परिस्थितियों में सूझबूझ और मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए अलग-अलग स्थानों से कुल 53 मजदूरों—13 महिलाओं और 40 पुरुषों—को सुरक्षित रेस्क्यू किया।

रेस्क्यू किए गए मजदूरों के पास न तो खाने की व्यवस्था थी और न ही घर लौटने के लिए किराया। ऐसे में घण्टाली थाना क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों के सहयोग से यात्रा और अन्य आवश्यक सुविधाएं जुटाई गईं और सभी मजदूरों को सुरक्षित प्रतापगढ़ लाया गया। इस पूरे मामले में शामिल दलाल सीताराम पाटिल, अलवर निवासी खान और अन्य जमींदारों के खिलाफ पुलिस थाना घण्टाली में प्रकरण दर्ज कर नियमानुसार अग्रिम कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि रेस्क्यू किए गए सभी मजदूरों को उनके गांव सुरक्षित पहुंचाया जाएगा। यह कार्रवाई न केवल बंधुआ मजदूरी जैसे अपराध पर करारा प्रहार है, बल्कि राजस्थान पुलिस के ध्येय वाक्य “आमजन में विश्वास, अपराधियों में भय” को साकार करती एक महत्वपूर्ण मिसाल भी है।

Pratahkal Bureau

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