छोटीसादड़ी में यादव समाज द्वारा होलिका दहन के तीसरे दिन पूरे उत्साह और हर्षोल्लास के साथ फागुन के रसिया गीतों के साथ होली मनाई गई। इस अवसर पर समाज के सदस्य एकत्रित हुए और रंगों के त्योहार का आनंद लिया। पारंपरिक रसिया गीतों ने समारोह को एक विशेष माहौल प्रदान किया, जिसमें समाज के लोग संग-संग नृत्य करते हुए होली की मस्ती में खो गए।

सामाजिक समरसता और परंपराओं का संगम

आयोजन के दौरान सामूहिक रूप से पुरुष एवं महिलाएं एकत्रित हो कर शोकाकुल परिवारों के घर पहुंचे जहां उन्होंने एक दूसरे को रंग लगा कर उनके दुःख में भागीदारी का परिचय दिया। यादव समाज ने इस बार होली के पर्व को न केवल रंगों से, बल्कि अपने सांस्कृतिक धरोहर से भी जीवित किया। इस दौरान समाज के वरिष्ठजनों, युवा साथियों सहित महिलाएं भी मौजूद रही।

एकता और भाईचारे का संदेश

समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने इस अवसर पर समाज के बीच एकता और भाईचारे को बढ़ावा देने की बात की। वे कहते हैं, "होली केवल रंगों का पर्व नहीं है, यह एकता, प्रेम और सामूहिकता का प्रतीक है। इस दिन हम सब अपने दिलों के रंगों को साझा करते हैं।" इस दौरान, विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट पकवानों का भी आनंद लिया गया। होली के गीतों और संगीत ने हर दिल को झूमने पर मजबूर कर दिया और वातावरण में एक अद्भुत रंगीनता बिखेर दी।

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Pratahkal Bureau

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