राजस्थान के उपखंड क्षेत्र छोटीसादड़ी अंतर्गत धोलापानी पुलिस थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। यहाँ एक न्यूज़ चैनल और दैनिक अखबार से जुड़े पत्रकार को पिछले दो महीनों से लगातार जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हैं, लेकिन स्थानीय पुलिस द्वारा अभियुक्तों के विरुद्ध कोई ठोस दंडात्मक कार्यवाही न किए जाने से पत्रकार जगत और स्थानीय जनमानस में भारी रोष व्याप्त है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, धोलापानी निवासी नानूराम पिता लालू मीणा, सांवरिया लाल पिता नानूराम मीणा एवं उनके परिजनों द्वारा पत्रकार को विगत दो माह से निरंतर डराया-धमकाया जा रहा है। इन धमकियों में पत्रकार को न केवल अपना काम बंद करने और चुप रहने की चेतावनी दी गई है, बल्कि उसे गंभीर परिणाम भुगतने व जान से मारने की बात भी कही गई है। पीड़ित पत्रकार का स्पष्ट आरोप है कि उसने इस प्रकरण के संबंध में पुलिस थाने में नामजद रिपोर्ट दर्ज कराते हुए पर्याप्त साक्ष्य भी सौंपे थे, किंतु पुलिस प्रशासन का रवैया अभियुक्तों के प्रति ढुलमुल बना हुआ है।

पुलिस ने पत्रकार की रिपोर्ट पर करीब एक माह के विलंब के बाद कार्यवाही तो की, लेकिन दोनों नामजद अभियुक्तों को मात्र शांति भंग की धाराओं में गिरफ्तार कर औपचारिकता पूरी की, जिसके बाद उन्हें तत्काल जमानत पर रिहा कर दिया गया। जमानत पर बाहर आते ही अभियुक्तों के हौसले और बुलंद हो गए और उन्होंने पत्रकार को पुनः डराना-धमकाना शुरू कर दिया। सुरक्षा की गुहार लगाते हुए पीड़ित पत्रकार ने रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, पुलिस उपाधीक्षक एवं स्थानीय थाना अधिकारी को कई बार लिखित व मौखिक सूचनाएं प्रेषित की हैं, परंतु इसके बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया है।

स्थानीय निवासियों और विभिन्न पत्रकार संगठनों ने पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि आरोपियों के साथ ‘मेहमान’ जैसा व्यवहार किया जा रहा है, जिससे पीड़ित को न्याय मिलना असंभव प्रतीत हो रहा है। पत्रकार संगठनों ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही अभियुक्तों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्यवाही और पत्रकार की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की, तो वे व्यापक स्तर पर आंदोलन करने हेतु बाध्य होंगे। फिलहाल, लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाने वाला पत्रकार दहशत के साये में जीने को विवश है, और अब सबकी निगाहें इस ओर टिकी हैं कि प्रशासन कब इस मामले में संज्ञान लेकर आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुँचाता है।

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