छोटीसादड़ी में रबी की बुवाई के बीच किसानों को यूरिया खाद लेने के लिए अतिरिक्त खाद खरीदने की शर्त का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि स्थानीय खाद विक्रेताओं की ओर से यूरिया के एक बैग के साथ डीएपी, एनपीके, सल्फर और जिप्सम जैसे अन्य उत्पाद खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है। ऐसे में जमाबंदी के आधार पर यूरिया वितरण की व्यवस्था शुरू होने के बावजूद किसानों की परेशानी कम होने के बजाय उनके सामने अतिरिक्त आर्थिक बोझ की समस्या खड़ी हो गई है।

राज्य सरकार ने किसानों को यूरिया के लिए लंबी-लंबी कतारों से राहत दिलाने के उद्देश्य से जमाबंदी के आधार पर खाद वितरण की व्यवस्था शुरू की है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर खाद विक्रेताओं के खिलाफ यूरिया के साथ दूसरे खाद उत्पाद खरीदने की अनिवार्यता थोपने के आरोप सामने आए हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें जरूरत के अनुसार यूरिया मिलने के बजाय ऐसे उत्पाद भी खरीदने पड़ सकते हैं, जिनकी उन्हें तत्काल आवश्यकता नहीं है।

रविवार सुबह उस समय यह मामला सामने आया, जब प्रातः काल अखबार के संवाददाता स्थानीय खाद विक्रेता के पास यूरिया का बैग लेने पहुंचे। वहां एक व्यक्ति और महिला भी यूरिया खरीदने के लिए इंतजार कर रहे थे। आरोप है कि दुकानदार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यूरिया का एक बैग चाहिए तो उसके साथ एनपीके, डीएपी और सल्फर का बैग भी खरीदना पड़ेगा। अन्यथा यूरिया का एक बैग भी नहीं मिलेगा।

दुकानदार की यह शर्त सुनकर संवाददाता और वहां मौजूद महिला हैरान रह गए। आरोप के अनुसार, यूरिया खरीदने के लिए अन्य खाद उत्पाद लेने की अनिवार्यता रखी जा रही है। यदि किसानों को वास्तव में इस तरह की शर्तों के आधार पर खाद दिया जा रहा है, तो सरकार की ओर से शुरू की गई वितरण व्यवस्था का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है और किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

रबी की फसलों की बुवाई के दौरान किसानों के लिए समय पर खाद उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। किसान अपने खेत की स्थिति, फसल और जरूरत के अनुसार खाद खरीदने पहुंचते हैं। ऐसे में यूरिया के साथ डीएपी, एनपीके, सल्फर और जिप्सम जैसे अन्य उत्पाद खरीदने का दबाव पड़ने से उनकी कृषि लागत बढ़ने की आशंका है।

बुवाई के समय किसान पहले ही बीज, डीजल, जुताई और अन्य कृषि कार्यों पर काफी खर्च कर चुके होते हैं। ऐसे में यूरिया के साथ अतिरिक्त खाद के बैग खरीदने की मजबूरी उनकी जेब पर सीधा असर डाल सकती है। किसानों का कहना है कि सरकार ने खाद वितरण की व्यवस्था उन्हें राहत देने के लिए शुरू की है, न कि उनकी जरूरत और मजबूरी का फायदा उठाकर अतिरिक्त खरीद के लिए दबाव बनाने के लिए।

सरकारी स्तर पर यूरिया वितरण को सुचारू बनाने के प्रयासों के बीच खाद विक्रेताओं पर लग रहे इन आरोपों ने निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। यह भी सवाल है कि खाद वितरण पर नजर रखने वाले जिम्मेदार अधिकारी ऐसी शिकायतों को किस तरह लेते हैं और इनके आधार पर क्या कार्रवाई करते हैं।

प्रशासन और कृषि विभाग के सामने अब यह सुनिश्चित करने की चुनौती है कि खाद विक्रेताओं के यहां वितरण व्यवस्था की जांच हो और किसानों को उनकी जरूरत के मुताबिक यूरिया उपलब्ध कराया जाए। साथ ही, किसी अन्य खाद उत्पाद की खरीद के लिए उन पर अनुचित दबाव नहीं बनाया जाए। रबी की बुवाई के महत्वपूर्ण दौर में किसानों को राहत मिलती है या उन्हें अतिरिक्त खाद खरीदने का बोझ उठाना पड़ता है, इस पर अब कृषि विभाग और प्रशासन की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

Shelendra Singh Yadav(Pratapgarh)

Shelendra Singh Yadav(Pratapgarh)

नाम: शैलेन्द्र सिंह यादव (Shelendra Singh Yadav)

वर्तमान पद: संवाददाता (प्रातःकाल)

कार्यक्षेत्र: छोटीसादड़ी, जिला प्रतापगढ़ (राजस्थान)

अनुभव: 10 वर्षों से अधिक

परिचय 

शैलेन्द्र सिंह यादव राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले छोटीसादड़ी क्षेत्र के संवाददाता हैं। वह मुख्य रूप से स्थानीय स्तर पर सामाजिक, धार्मिक एवं जमीनी हकीकत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां और समाचार एकत्रित कर उन्हें प्रकाशित करने का कार्य करते हैं।

बीट और कवरेज (Beats & Coverage)

वह अपने कार्यक्षेत्र से निम्नलिखित सभी प्रमुख विषयों पर नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं:

  • राजनीति: स्थानीय राजनीतिक घटनाक्रम, चुनाव और जनप्रतिनिधियों से जुड़े समाचार।
  • क्राइम: पुलिस कार्रवाई, कानून-व्यवस्था और अपराध से संबंधित मामले।
  • प्रशासन: सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली, प्रशासनिक निर्णय और विकास कार्य।
  • शिक्षा एवं स्वास्थ्य: क्षेत्र की शैक्षणिक व्यवस्था, चिकित्सा सेवाएं और सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं।
  • बिज़नेस: स्थानीय बाजार, व्यापारिक गतिविधियां और आर्थिक मुद्दे।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने अपनी शिक्षा में स्नातक (Graduate) की डिग्री हासिल की

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