छोटी सादड़ी: ई-रवन्ना सेवा बंद होने से खनन कार्य ठप, व्यापारियों ने सौंपा ज्ञापन
छोटी सादड़ी में ई-रवन्ना सेवा अचानक बंद होने से रेड ओकर खनन कारोबार पूरी तरह ठप हो गया है। हजारों परिवारों की आजीविका पर संकट के बीच व्यापारियों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल। क्या बहाल होगी खनन परिवहन की सेवा?

छोटी सादड़ी में ई-रवन्ना सेवा बंद किए जाने के विरोध में उपखंड अधिकारी कार्यालय में प्रदर्शन करते हुए खदान पट्टाधारी और खनन व्यवसायी।
छोटी सादड़ी क्षेत्र में रेड ओकर (गेरू) खनन व्यवसाय से जुड़े पट्टाधारियों और व्यापारियों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं। स्थानीय खनिज विभाग द्वारा अचानक ई-रवन्ना (e-Ravanna) सेवा बाधित कर दिए जाने से पूरा खनन कार्य ठप हो गया है, जिसका सीधा असर हजारों परिवारों की आजीविका पर पड़ा है। इस समस्या से व्यथित व्यवसायियों ने एकजुट होकर उपखंड अधिकारी कार्यालय में प्रदर्शन किया और उपखंड अधिकारी यतीन्द्र पोरवाल को एक ज्ञापन सौंपकर तत्काल प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग की है।
खनन व्यवसायियों का आरोप है कि विभाग ने किसी भी पूर्व सूचना, लिखित आदेश या नोटिस के बिना 3 जून को दोपहर 12 बजे मौखिक निर्देशों के आधार पर ई-रवन्ना आईडी ब्लॉक कर दी। इस मनमाने निर्णय ने जिले भर की खदानों से खनिज परिवहन को पूरी तरह रोक दिया है। व्यापारियों का तर्क है कि रेड ओकर का व्यवसाय अत्यधिक मौसमी है और मानसून के आगमन से पूर्व की यह अवधि खनन के लिए महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में अचानक आई इस बाधा से न केवल निवेश प्रभावित हुआ है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।
ज्ञापन में विभाग द्वारा किए गए ड्रोन सर्वे की विश्वसनीयता पर भी कड़े सवाल उठाए गए हैं। पट्टाधारियों का कहना है कि पूर्व में भी इस प्रकार के सर्वे को लेकर न्यायालयों में आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं और कई मामलों में स्टे ऑर्डर भी प्राप्त हुए हैं। व्यवसायियों का दावा है कि जलभराव की स्थिति में किए गए ड्रोन सर्वे के आंकड़े वास्तविक धरातलीय स्थिति से मेल नहीं खाते, इसलिए मापन कार्य 'फील्ड-टू-फील्ड' भौतिक सत्यापन के जरिए ही किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि रेड ओकर सीधे सीमेंट संयंत्रों में भेजा जाता है, जहां ई-रवन्ना के बिना प्रवेश असंभव है, अतः अवैध परिवहन के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं।
आर्थिक मार झेल रहे व्यापारियों ने यह भी बताया कि खनिज विभाग के निर्देशानुसार उन्होंने हाल ही में लाखों रुपये खर्च करके ऑटोमेशन डिवाइस और जीपीएस ट्रैकर लगवाए थे। प्रशासन ने इनके लिए 10 जून की समय सीमा निर्धारित की थी, लेकिन समय सीमा समाप्त होने से पहले ही ई-रवन्ना सेवा बंद कर दी गई। खबर लिखे जाने तक खनिज विभाग की ओर से इस संदर्भ में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है। अब देखना यह है कि प्रशासन व्यापारियों की गुहार पर कब तक संज्ञान लेता है और बंद पड़ी इस सेवा को कब तक बहाल किया जाता है।

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