श्री राधा-कृष्ण मंदिर, यादव मोहल्ला परिसर में गणपति महोत्सव के आगाज के साथ ही अनूठा गणेश पांडाल श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन गया है। यहां पहुंचते ही लोगों को प्रकृति की अनुपम छटा के बीच भगवान गणेश के दर्शन हो रहे हैं। पेड़ों की छाल, लताओं और मिट्टी से तैयार प्राकृतिक गणपति प्रतिमा के साथ दस दिवसीय गणेशोत्सव का शुभारंभ हुआ।

विघ्नहर्ता मित्र मंडल के पर्यावरण प्रेमी युवाओं ने करीब दो माह के अथक प्रयासों के बाद प्राकृतिक स्वरूप में गणपति प्रतिमा तैयार कर स्थापित की। पांडाल की सजावट भी इस तरह की गई है कि यहां पहुंचने पर श्रद्धालुओं को घने जंगल के बीच प्रकृति की गोद में पहुंचने का अहसास होता है।

पांडाल में पीपल, आम और नीम के पेड़ों की छाल तथा प्राकृतिक पेड़ों की लताओं का उपयोग कर भगवान गणेश की प्रतिमा को आकर्षक स्वरूप दिया गया है। वहीं, परिसर में कल-कल करता झरना, वटवृक्ष की लताएं और घने जंगल का वास्तविक स्वरूप तैयार किया गया है। पूरे परिसर को पर्यावरण के अनुकूल रखते हुए प्रकृति के वास्तविक स्वरूप को उकेरने का प्रयास किया गया है।

प्राकृतिक वातावरण के बीच विराजित गणपति की यह प्रतिमा श्रद्धालुओं को आध्यात्मिकता के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही है। आयोजकों का कहना है कि गणेशोत्सव केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी को समझने का अवसर भी है।

प्राकृतिक झरने, घने जंगल, पेड़ों की लताएं और उन्हीं प्राकृतिक संसाधनों से तैयार गणपति प्रतिमा का अनूठा संयोजन लोगों को खूब आकर्षित कर रहा है। अब तक जिस तरह के प्राकृतिक दृश्य लोगों ने फिल्मों या कल्पनाओं में देखे थे, उसी तरह का वातावरण छोटीसादड़ी के गणेश पांडाल में साकार किया गया है।

प्रतिमा स्थापना के बाद से ही यह पांडाल नगर में चर्चा का विषय बना हुआ है। गणपति के अनूठे स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। युवाओं के इस प्रयास की नगरवासियों द्वारा सराहना की जा रही है।

Pratahkal Bureau

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