कुणी। भीषण अग्निकांड हो या अचानक आया भूकंप, आकाशीय बिजली का कहर हो या फिर डूबते को बचाना—विपत्ति कभी बताकर नहीं आती, लेकिन तैयारी ही वह एकमात्र ढाल है जो जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय करती है। राजस्थान के कुणी स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रांगण में आज कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जहाँ किताबी ज्ञान से इतर विद्यार्थी जीवन की सबसे बड़ी परीक्षा यानी 'जीवन रक्षा' के गुर सीखते नजर आए। नागरिक सुरक्षा विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस विशेष आपदा प्रबंधन एवं बचाव प्रशिक्षण कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को न केवल सजग बनाया, बल्कि उन्हें भविष्य का 'लाइफ सेवर' बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम बढ़ाया है।

इस महत्वपूर्ण पहल की कमान संभालते हुए आपदा प्रबंधन एवं नागरिक सुरक्षा के डिप्टी चीफ वार्डन उमेश कुमार रैदास ने कार्यक्रम की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि बदलते वैश्विक परिवेश और बढ़ती प्राकृतिक व मानवीय आपदाओं के बीच यह अनिवार्य हो गया है कि नई पीढ़ी को शुरुआती स्तर से ही व्यावहारिक जानकारी दी जाए। इसी दूरगामी सोच के साथ विद्यालय स्तर पर इस व्यावहारिक कार्यशाला का खाका बुना गया, जिसमें विशेषज्ञों ने सीधे संवाद और प्रदर्शन के जरिए सुरक्षा के जटिल समीकरणों को सरल भाषा में समझाया।

प्रशिक्षण के दौरान नागरिक सुरक्षा के अनुभवी मास्टर ट्रेनर नरेन्द्र कुमावत, रोशन मीणा, मोहनलाल मीणा एवं फतेशंकर ने मोर्चा संभाला। उन्होंने अपनी विशेषज्ञता का प्रदर्शन करते हुए विद्यार्थियों को प्राथमिक उपचार की बारीकियों से अवगत कराया। मैदान में जब सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) की तकनीक का सजीव प्रदर्शन किया गया, तो विद्यार्थी यह देखकर दंग रह गए कि कैसे सही दबाव और सांस देने की प्रक्रिया किसी की थमती धड़कनों को पुनर्जीवित कर सकती है। प्रशिक्षकों ने पट्टियों के सही उपयोग, आपात स्थिति में उपलब्ध संसाधनों से काम चलाऊ संरचनाएं तैयार करने और जल भराव की स्थिति में राफ्ट बनाने की विधियों का न केवल सैद्धांतिक बल्कि व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया।

सुरक्षा के इस महाकुंभ में केवल बचाव ही नहीं, बल्कि बचाव के उपकरणों पर भी जोर दिया गया। आग लगने की स्थिति में फायर एक्सटिंग्विशर का सही संचालन, आकाशीय बिजली और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर गहन चर्चा हुई। विशेष रूप से सर्पदंश जैसी घटनाओं में समय रहते किए जाने वाले प्राथमिक उपचार की जानकारी दी गई, जो ग्रामीण अंचलों में अक्सर प्राणघातक साबित होती है। जिज्ञासाओं से भरे इस सत्र में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक अपनी शंकाओं का समाधान किया। अंततः यह आयोजन महज एक प्रशिक्षण कार्यक्रम न रहकर आत्मनिर्भरता का एक संकल्प बन गया, जिसने यह सिद्ध कर दिया कि यदि युवा शक्ति प्रशिक्षित हो, तो किसी भी आपदा का सामना साहस और सूझबूझ से किया जा सकता है।

Pratahkal Newsroom

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