प्रतापगढ़ में सर्राफा व्यापारियों के खिलाफ बड़ी साजिश: झूठी शिकायतों और दलालों के आतंक से सहमा बाजार, एसपी-कलेक्टर तक पहुंची गूंज

प्रतापगढ़। सोने और चांदी की आसमान छूती कीमतों के बीच राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले का सर्राफा बाजार इन दिनों एक अजीबोगरीब और खौफनाक चुनौती से जूझ रहा है। जिले के प्रतिष्ठित व्यापारियों को निशाना बनाने के लिए 'ब्लैकमेलिंग' का एक सुनियोजित जाल बुना जा रहा है, जिससे पूरे व्यापारिक जगत में भारी आक्रोश और भय का माहौल है। झूठी शिकायतों और अवैध वसूली के इस बढ़ते चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए अब प्रतापगढ़ सर्राफा व्यापारी एसोसिएशन ने हुंकार भरी है। व्यापारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर और जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने असामाजिक तत्वों द्वारा फैलाए जा रहे इस संगठित अपराध पर लगाम लगाने की गुहार लगाई है।

एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने प्रशासन के समक्ष सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि जिले में कुछ दलाल और असामाजिक तत्व सक्रिय हैं, जो निर्दोष व्यापारियों को फंसाने के लिए झूठे फरियादी तैयार कर रहे हैं। इन साजिशकर्ताओं का मुख्य हथियार 'गिरवी' रखे जेवर हैं। यह गिरोह भोले-भाले लोगों को मोहरा बनाकर सर्राफा व्यापारियों पर सोना-चांदी गिरवी रखने और फिर उसे वापस नहीं करने जैसे झूठे और निराधार आरोप मढ़ रहा है। पुलिस कार्रवाई का डर दिखाकर ये दलाल व्यापारियों से मोटी रकम की उगाही करने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे न केवल व्यापारियों की साख दांव पर लगी है, बल्कि उनके भीतर असुरक्षा की भावना भी घर कर गई है।

ज्ञापन के माध्यम से व्यापारियों ने प्रशासन के सामने स्पष्ट मांग रखी है कि यदि कोई व्यक्ति किसी व्यापारी पर जेवर हड़पने का आरोप लगाता है, तो पुलिस को सीधे कार्रवाई करने के बजाय सबसे पहले ठोस सबूतों की मांग करनी चाहिए। व्यापारियों का कहना है कि किसी भी शिकायत पर संज्ञान लेने से पहले पक्के बिल, गिरवी रखने के वैध दस्तावेज, आपसी अनुबंध या ब्याज भुगतान की रसीद जैसे प्राथमिक साक्ष्यों की गहन जांच अनिवार्य की जाए। बिना किसी दस्तावेजी प्रमाण के व्यापारियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि लेन-देन या अनुबंध से जुड़े विवाद पूरी तरह से सिविल न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, इसलिए ऐसे मामलों में पुलिस का सीधा हस्तक्षेप विधि सम्मत नहीं है।

सुरक्षा की दृष्टि से सर्राफा एसोसिएशन ने जाली दस्तावेजों की आशंका जताते हुए उनकी फॉरेंसिक जांच कराने और जिले में सक्रिय ऐसे गिरोहों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है। व्यापारियों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि यदि समय रहते इन दलालों पर नकेल नहीं कसी गई, तो भविष्य में कोई बड़ी अप्रिय घटना घट सकती है। इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन के बाद अब गेंद प्रशासन के पाले में है। प्रतापगढ़ का सर्राफा बाजार अब टकटकी लगाए देख रहा है कि कानून के रखवाले व्यापारियों के सम्मान और सुरक्षा की रक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं। यह मामला केवल एक व्यापारिक विवाद नहीं, बल्कि शहर की व्यावसायिक गरिमा को बचाने की एक बड़ी लड़ाई बन गया है।

Dilip Sen, Pratapgarh

Dilip Sen, Pratapgarh

नाम: दिलीप सेन

वर्तमान पद: रिपोर्टर, जिला मुख्यालय (प्रातः काल)

कार्यक्षेत्र: प्रतापगढ़ जिला (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): क्राइम, राजनीति, और धर्म-कर्म

परिचय 

दिलीप सेन राजस्थान के प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय पर रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह मुख्य रूप से प्रतापगढ़ जिले और जिला मुख्यालय से जुड़े आपराधिक मामलों (क्राइम), स्थानीय राजनीति और धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों (धर्म-कर्म) की खबरों को कवर करते हैं। इन विषयों में उनकी विशेष रुचि और अच्छी पकड़ है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

दिलीप सेन को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में विभिन्न प्रिंट और डिजिटल न्यूज़ चैनलों के साथ काम करने का अनुभव है। वह निम्नलिखित मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं:

  • दैनिक भास्कर
  • सीधा सवाल
  • सच बेधड़क न्यूज़ चैनल
  • प्रातः काल (जिसके साथ वह साल 2025 से निरंतर जुड़े हुए हैं)

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने अपनी शिक्षा 12वीं पास तक पूरी की है।

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