छोटी सादड़ी। केंद्र सरकार द्वारा 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की संदर्भ शर्तों (ToR) की घोषणा के साथ ही देशव्यापी विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं। गत 28 अक्टूबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए निर्णयों को लेकर कर्मचारी नेताओं ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय पेंशन भवन में आयोजित पेंशनभोगियों की साधारण सभा को संबोधित करते हुए प्रखर कर्मचारी नेता शंकर लाल मीणा ने कहा कि आयोग की शर्तों में 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और पेंशन लाभों के निर्धारण की रूपरेखा तो तय की गई है, किंतु 65 लाख पेंशनभोगियों की पूरी तरह से अनदेखी की गई है, जो कि अत्यंत निराशाजनक और निंदनीय है।

मीणा ने तीखे प्रहार करते हुए कहा कि सरकार ने आयोग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कर्मचारियों के लिए पेंशन परिवर्तन की सिफारिश करते समय 'अनफंडेड पेंशन योजना' यानी पुरानी पेंशन योजना की लागत का विशेष ध्यान रखा जाए, लेकिन मौजूदा पेंशनभोगियों के हितों पर सरकार मौन है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नियत में खोट है और पेंशनभोगियों को उनके अधिकारों से वंचित करने की साजिश रची जा रही है। कर्मचारी नेता ने उपस्थित जनसमूह से लंबे संघर्ष का आह्वान करते हुए धरना, प्रदर्शन और आमरण अनशन जैसे उग्र आंदोलनों के लिए तैयार रहने की अपील की।

पेंशनर्स के केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता वीरेंद्र औदिच्य ने की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बाबूलाल नागदा उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के तौर पर डॉ. जगन्नाथ सोलंकी और हीरालाल शर्मा ने शिरकत की। अधिवेशन के दौरान कोषाध्यक्ष जगदीश चंद्र कुमावत ने आय-व्यय का पूरा हिसाब प्रस्तुत किया। सभा को कई अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया, जिसमें सभी पेंशन साथियों ने एकजुट होकर संघर्ष के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता जताई।

सभा के समापन के पश्चात आक्रोशित पेंशनभोगियों ने काली पट्टियां बांधकर सरकार की नीतियों के विरुद्ध विरोध दर्ज कराया। उपशाखा अध्यक्ष वीरेंद्र औदिच्य के नेतृत्व में सभी सदस्य जुलूस की शक्ल में जोरदार नारेबाजी करते हुए उपखंड कार्यालय पहुंचे। वहां उपखंड अधिकारी यतिन्द्र पोरवाल को प्रधानमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रमुख रूप से कन्हैयालाल जटिया, राजेंद्र जैन, सत्यनारायण शर्मा, प्रेमचंद मोहिल, विष्णु लाल नागदा, राजेंद्र औदिच्य, सुरेशचंद शर्मा, बाबूराव मराठा, नरेंद्र कुमार औदिच्य, पारसमल जैन, आसाराम सोलंकी, मनोहर सिंह चौहान और प्रहलाद राय शर्मा सहित बड़ी संख्या में पेंशनर उपस्थित रहे। यह आंदोलन आने वाले समय में केंद्र सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

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